स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द के खिलाफ सड़कों पर उतरी महिलायें, हाथों में तख्तियां लेकर किया जोरदार प्रदर्शन, लगाया यह गंभीर आरोप

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Published By Deepak Mishra
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वाराणसी। ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के एक बयान के विरोध में गुरुवार को दलित महिला परिषद ने लमही स्थित मुंशी प्रेमचन्द स्मृति द्वार पर जमकर प्रदर्शन किया। इससे पहले दलित महिला परिषद की नेता खुशी रमन के नेतृत्व में महिलाओं ने मुंशी प्रेमचन्द स्मारक से प्रेमचन्द स्मृति द्वार तक आक्रोश मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां लिए, भिंची मुट्ठियों के साथ ड्रम की थाप पर नारे लगाती दलित महिलाओं ने शंकराचार्य के खिलाफ अपना विरोध दर्ज किया।

महिलाओं का आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने हाल ही में एक बयान में दावा किया था कि "10 लाख हिन्दू लड़कियों का विवाह मुस्लिम घरों में करा दिया गया"। इस बयान से नाराज दलित महिला परिषद की महिलाओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी सरकार को पलटने की साजिश रच रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बदनाम करके सेकुलर दलों की तरह हिन्दू धर्म तथा दलित बेटियों को बदनाम करना चाहते हैं।

दलित महिला परिषद की नेता खुशी रमन ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने समाज सुधारक इन्द्रेश कुमार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 10 लाख हिन्दू बेटियों का विवाह मुसलमानों के घर करवा दिया। इन्द्रेश कुमार ने स्वामी के इस बयान को सिरे से झूठा करार दिया। इस मामले के सामने आते ही दलित महिलाओं में गहरी नाराजगी फैल गई।

खुशी रमन ने कहा कि इन्द्रेश कुमार दलितों के उत्थान के लिए निरंतर काम कर रहे हैं, इसलिए स्वामी उन्हें बदनाम कर रहे हैं। कई दलित महिलाएँ इन्द्रेश कुमार को अपना गुरु मानती हैं। महिलाओं ने स्वामी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनसे चुनौती दी है कि यदि उन्होंने 10 लाख हिन्दू लड़कियों के बारे में कहा है, तो कम से कम 10 हजार लड़कियों के नाम बता दें।

उन्होंने स्वामी से सवाल किया, "अंबानी की शादी में जाने की फुर्सत तो है, लेकिन कभी किसी दलित बेटी की शादी में गए हैं। किसी दलित बच्चे को अपनी थाली में खाना खिलाया है? या किसी दलित महिला का सम्मान किया है।" दलित महिला परिषद को समर्थन देने पहुँची डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि स्वामी को एक समाज सुधारक के बारे में इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था।

अगर 10 लाख शादियाँ हो रही थीं तो स्वामी उस समय चुप क्यों रहे? झूठ बोलकर उन्हें कुछ नहीं मिलेगा, सिवाय रुस्वाई के। महिलाओं की नेता सरोज देवी ने कहा, "कोई भी हो, अगर हमारे गुरुदेव के खिलाफ बोलेगा तो हम सड़क पर आंदोलन करेंगी। जिन्हें बदनाम किया है, स्वामी उनके नाम बताएँ।" 

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