वाइल्ड लाइफ: उड़ने वाली गिलहरी
अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों में स्थित नामदफा नेशनल पार्क जैव विविधता का अनमोल खजाना है। इसी समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में एक बेहद रोचक और दुर्लभ जीव पाया जाता है- उड़ने वाली गिलहरी। यह अनोखा स्तनधारी वास्तव में उड़ता नहीं, बल्कि अपने शरीर की विशेष झिल्ली (पैटाजियम) की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक आसानी से फिसल (ग्लाइड) करता है। उड़ने वाली गिलहरी की यह क्षमता उसे जंगल में जीवित रहने में महत्वपूर्ण बढ़त देती है। ऊंचे-ऊंचे पेड़ों के बीच यह बिना जमीन पर उतरे लंबी दूरी तय कर लेती है, जिससे वह ज़मीन पर मौजूद शिकारी जीवों जैसे सांप या जंगली बिल्ली से खुद को सुरक्षित रखती है।
यह प्रजाति मुख्यतः निशाचर होती है, यानी रात के समय सक्रिय रहती है और दिन में पेड़ों की खोखली शाखाओं या घोंसलों में छिपी रहती है। उत्तर-पूर्व भारत में पाई जाने वाली प्रमुख प्रजातियों में रेड जाइंट Red जाइंट फ्लाइंग स्क्विरल और नामदफा फ्लाइंग स्क्विरल शामिल हैं। इनमें से नामदफा फ्लाइंग स्क्विरल अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और इसके बारे में वैज्ञानिक जानकारी भी सीमित है। इसकी खोज ने इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को और अधिक उजागर किया है।
हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि उड़ने वाली गिलहरियां बीज फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे फल और बीज खाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती हैं, जिससे जंगलों के पुनर्जीवन और संतुलन में मदद मिलती है। इस तरह यह छोटा-सा जीव पूरे वन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी कड़ी बन जाता है। हालांकि वनों की कटाई और मानव हस्तक्षेप के कारण इनका प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन भी इनके जीवन चक्र और भोजन की उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के अनुसार, कई उड़ने वाली गिलहरी प्रजातियां संकटग्रस्त या डेटा-अभाव श्रेणी में आती हैं, जिससे इनके संरक्षण की आवश्यकता और बढ़ जाती है। नामदफा नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्र इन जीवों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं, लेकिन केवल संरक्षित क्षेत्र ही पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय समुदायों की भागीदारी, जागरूकता और सतत विकास नीतियां भी उतनी ही जरूरी हैं। यह शर्मीला और सुंदर जीव न केवल उत्तर-पूर्व भारत की प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि प्रकृति के हर छोटे-बड़े जीव का अपना महत्व है। उड़ने वाली गिलहरी हमें सिखाती है कि संतुलन और अनुकूलन ही जंगल के जीवन का आधार है और इसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
