ईंधन की महंगाई के डर ने ईवी की मांग बढ़ाई
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन अब विकल्प से आगे बढ़कर बन रहे भविष्य की जरूरत युद्ध के कारण मार्च माह में अब तक इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में दर्ज किया गया उछाल
पश्चिम एशिया में एक माह से ज्यादा समय से जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार और ऑटोमोबाइल उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया भर में गहराते पेट्रोल-डीजल तथा गैस के संकट को देखते हुए लोगों की मांग इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की तरफ मुड़ती नजर आ रही है।
भविष्य में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ने की आशंका के कारण उपभोक्ता पेट्रोल-डीजल या सीएनजी कारों का मोह छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि देश में पेट्रोल-डीजल या सीएनजी की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में दाम बढ़ाए जा सकते हैं। उनकी इस आशंका की झलक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कार डीलरों से मिल रही है।
बीते 15 दिनों में नई ईवी के लिए पूछताछ में 30 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। आटो सेक्टर विशेषज्ञ भी मौजूदा हालात में ईवी और प्लग-इन हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक वाहनों (पीएचईवी) के साथ इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहनों की मांग बढ़ने से इंकार नहीं कर रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण मार्च माह के 23 दिनों में ही इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण पिछले साल के मार्च माह के कुल आंकड़ों का 90 फीसदी से अधिक हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार 11 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, साल 2025 के मार्च माह में कुल 12,356 इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई थी। इसी अवधि में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री करीब 1.38 लाख यूनिट्स हो चुकी है, जो पिछले साल इसी महीने में कुल बिक्री 1.31 लाख से काफी अधिक है।
पुरानी कारों का कारोबार करने वालों की मानें तो युद्ध के कारण कार खरीदने का ट्रेंड भी बदलता नजर आ रहा है। बाजार में यूज्ड ईवी के लिए पूछताछ और मांग बढ़ गई है। युद्ध और लंबा खिंचता है, तो यह बदलाव आने वाले समय में और रफ्तार पकड़ सकता है। ऑटो बाजार के आंकड़ों के मुताबिक देश में साल 2025 में लगभग 13 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिके थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 फीसदी से अधिक की वृद्धि थी। यदि खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो इस वर्ष यह वृद्धि दर 20 फीसदी से अधिक रहने की उम्मीद लगाई जा रही है।
ईवी कंपनियां जल्द ला सकती, बैटरी-एज-ए-सर्विस मॉडल
ईवी निर्माता कंपनियों ने भी लोगों का रुझान देखते हुए नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें बैटरी-एज-ए-सर्विस मॉडल को अपनाने की बात कही जा रही है, जिसमें ग्राहक को बैटरी की पूरी कीमत एक साथ नहीं देनी होगी। इस कदम से ईवी खरीदना पेट्रोल कार जितना सस्ता हो जाएगा।
सरकार भी युद्ध की स्थिति को देखते हुए देश में ही बैटरी सेल बनाने पर अधिक जोर दे रही है ताकि बाहरी देशों पर निर्भरता कम की जा सके। वैसे भी भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सभी नए वाहनों की बिक्री का कम से कम 30 फीसदी हिस्सा ईवी हो, ऐसे में वर्तमान संकट इस बदलाव को और गति देगा, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
80 % बैटरी चार्ज करें, फास्ट, चार्जिंग जरूरत पर ही अपनाएं
इलेक्ट्रिक वाहन में सबसे जरूरी पार्ट उसकी बैटरी होती है। कई कार कंपनियां ईवी की बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी देती हैं। इससे बड़ी खराबी आने पर परेशान होने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन, फिर भी कुछ छोटी-मोटी बातों का ध्यान रखकर ग्राहक बैटरी की क्षमता और कार्यकुशलता बढ़ा सकते हैं। जैसे कार की बैटरी को हर समय 100 फीसदी चार्ज रखना जरूरी नहीं है। स्मार्ट फोन की तरह ही इसे आप 80 फीसदी तक चार्ज रख सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज न होने पाए।
20 फीसदी से कम चार्जिंग होते ही बैटरी को चार्जर से कनेक्ट कर दें। कई इलेक्ट्रिक कारों में फास्ट चार्जिंग की सुविधा होती है, जिससे उन्हें आधा या पौन घंटे में ही चार्ज किया जा सकता है, जबकि साधारण चार्जर से कार को फुल चार्ज करने में सात घंटे का समय लगता है।
फास्ट चार्जिंग की सुविधा अच्छी है लेकिन, इसका इस्तेमाल हमेशा नहीं करना चाहिए। फास्ट चार्जिंग में बैटरी को कम समय में बहुत ज्यादा पावर दी जाती है, जिससे हीट जेनरेट होती है और यह हीट समय के साथ बैटरी की क्षमता को प्रभावित करती है। ऐसे में समय नहीं हो और लंबी यात्रा पर जाना हो, तभी फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करना चाहिए।
