Parliament Session: IBC संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पारित, बोलीं वित्त मंत्री- इससे बढ़ेगा निवेशकों का भरोसा

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करने के मुख्य उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कंपनियों के दिवाला मामलों का अदालत के बाहर समाधान किया जा सकेगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। 

उन्होंने कहा कि यह विधेयक अगस्त 2025 में लोक सभा में लाया गया था, तथा इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था। प्रवर समिति ने गहनता और गंभीरता से विचार करने के बाद 11 संशोधन सुझाये हैं और सभी को इसमें शामिल कर लिया गया है। इसमें क्रेडिटर को अधिक अधिकार दिये गये हैं। क्रेडिटर समाधानकर्ता की चयन प्रक्रिया में अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लायी जा सकेगी और समाधान प्रक्रिया तेज होगी।

सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक में प्रावधान किये गये हैं कि एनसीएलएटी में अपील के बाद तीन महीने के अंदर उसका फैसला आ जाये। उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में बीमार कंपनियों के समाधान में देरी से बचने के पर्याप्त उपाय किये गये हैं। इसमें कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। उनकी जितनी देयता है, उसे प्राथमिकता पर रखा जायेगा। 'कर्मचारियों के हितों से हम बिलकुल समझौता नहीं करेंगे।' विधेयक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। 

सीतारमण ने कहा कि 2016 में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता कानून लाये जाने के बाद से जो संकटग्रस्त कंपनियों का समाधान प्रक्रिया से गुजरी हैं, वे बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। बीमार कंपनियों से बैंकों का डूबा पैसा निकालने के प्रतिशत में बहुत बढ़ोतरी हो गयी है और अब यह 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि बैंक धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) ने 1105 केसों की जांच की, जिसमें 64920 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

भगोड़े आर्थिक अपराधी के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की गयी है और ऐसे मामलों के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय समस्या को भी समाधान करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा न्यायिक अधिकार में लेनदारों के मामले में काफ़ी सुरक्षा के उपाय किया गये हैं। अब लेनदार या देनदार का किसी भी तरीके से ग़लत उपयोग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी कंपनी या क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है और सभी को एक तरह से डील किया जाता है। श्रीमती सीतारमण के जवाब के बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। 

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