चैत्र नवरात्री: मां नंदादेवी भक्तों को सपने में देती हैं दर्शन 

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Published By Anjali Singh
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अल्मोड़ा में स्थित मां नंदा देवी का पावन मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यहां स्थापित मां नंदा देवी को शैलपुत्री का रूप माना जाता है। अल्मोड़ा की नंदा देवी चंद वंश राजाओं की कुलदेवी हैं, जो आज भी अपने भक्तों को सपने में दर्शन देती हैं और उनकी मनोकामना पूरी करती हैं। पुजारी तारा दत्त जोशी बताते हैं कि यह मंदिर प्राचीन काल का है और माता की मूर्ति की स्थापना इस प्रांगण में करीब 200 साल पहले की गई थी।

इससे पहले नंदा देवी को मल्ला महल में पूजा जाता था। उसके बाद इस प्रांगण में माता की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। तब से लेकर आज तक यहां माता की पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में हर महीने हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के द्वारा यह भी कहा जाता है कि माता ने उन्हें सपने में आकर दर्शन दिए, जिसके बाद वह इस मंदिर तक पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि चंद वंशज राज परिवार मां नंदादेवी को अपनी कुल देवी के रूप में पूजन करते है। 
 
200 अशर्फियों को गलाकर हुई मंदिर की स्थापना :  नंदादेवी मंदिर समिति संयोजक अर्जुन बिष्ट ने बताया कि 1670 में बाज बहादुर चंद बधानगढ़ से नंदादेवी की स्वर्ण प्रतिमा अल्मोड़ा लाए थे। 1699 में राजा ज्ञानचंद भी बधानकोट से एक स्वर्ण प्रतिमा अल्मोड़ा लाए। 1710 में राजा जगत चंद को बधानकोट विजय के अवसर पर नंदादेवी की प्रतिमा प्राप्त नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने खजाने से 200 अशर्फियों को गलाकर नंदादेवी की प्रतिमा का निर्माण कराया और इन्हें मल्ला महल स्थित नंदादेवी मंदिर में प्रतिष्ठित कराया। 

जिस परिसर में वर्तमान नंदादेवी मंदिर स्थित है, वहां पर 1690-91 में तत्कालीन नरेश उद्योत चंद ने दो शिव मंदिर उद्योत चंद्रेश्वर और पार्वती चंद्रेश्वर बनाए। अंग्रेजी शासनकाल में 1815 में तत्कालीन कमिश्नर ट्रेल ने उन्हें उद्योत चंद्रेश्वर मंदिर में रखवा दिया। इसके बाद कमिश्नर ट्रेल उनकी आंखों की रोशनी अचानक काफी कम हो गई। कुछ लोगों की सलाह पर उन्होंने अल्मोड़ा आकर 1816 में नंदादेवी का मंदिर बनवाकर (वर्तमान मंदिर) वहां नंदादेवी की मूर्ति स्थापित कराई। उसके बाद उनके आंखों की रोशनी लौट आई।
 
मंदिरों में खजुराहो कलाकृति: नंदादेवी मंदिर अल्मोड़ा की मंदिर की निर्माण शैली भी काफी पुरानी है। यहां उद्योत चंद्रेश्वर मंदिर की स्थापना 17 वीं शताब्दी के अंत में मानी जाती है। उद्योत चंद्रेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से में एक लकड़ी का छज्जा है। मंदिर में बनी कलाकृति खजुराहो मंदिरों की तर्ज पर है। ये मंदिर संरक्षित श्रेणी में शामिल हैं।

चंद वंशज करते हैं तांत्रिक पूजा : अल्मोड़ा में मां नंदा की पूजा-अर्चना तारा शक्ति के रूप में तांत्रिक विधि से करने की परंपरा है। पहले से ही विशेष तांत्रिक पूजा चंद शासक व उनके परिवार के सदस्य करते आए हैं। वर्तमान में चंद वंशज नैनीताल के पूर्व सांसद स्व. केसी सिंह बाबा का परिवार राजा के रूप में पूजा में बैठते हैं।-रमेश जड़ौत , अल्मोड़ा 

 

 

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