दिवस विशेष: बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह तनाव और नशा, मां-बाप से बच्चों में 40 प्रतिशत तक जोखिम
बरेली, अमृत विचार। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर बीमारी बाइपोलर डिसऑर्डर तेजी से लोगों को प्रभावित कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार यदि माता-पिता में यह बीमारी है तो बच्चों में खतरा करीब 40 प्रतिशत बढ़ जाता है। तीव्र तनाव और नशे की लत भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
जिला अस्पताल के मन कक्ष प्रभारी डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जो व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसमें मरीज कभी अत्यधिक खुशी और ऊर्जा से भर जाता है, तो कभी गहरे अवसाद में चला जाता है। इस कारण उसकी सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित हो जाती है। ये दो तरीके से काम करता है। पहले तरीके में मैनिक एपिसोड के दौरान व्यक्ति खुद को बेहद खुश, ऊर्जावान और आत्मविश्वासी महसूस करता है।
उसे नींद की जरूरत कम लगती है और वह बिना सोचे-समझे फैसले लेने लगता है, जिससे कई बार वह मुश्किल में पड़ जाता है। वहीं दूसरे तरीके में डिप्रेसिव एपिसोड में व्यक्ति गहरी उदासी, निराशा, कम ऊर्जा, ध्यान की कमी और पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि खत्म होने जैसे लक्षण महसूस करता है। कई मामलों में आत्महत्या के विचार भी आने लगते हैं, जो स्थिति को और गंभीर बना देते हैं। जिला अस्पताल के मन-कक्ष में हर महीने करीब 90 से 100 मरीज आते हैं।
मरीजों को दवा और काउंसलिंग से उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि नींद न आना, अचानक वजन में बदलाव, अत्यधिक खुशी या गहरी उदासी, आत्महत्या के विचार जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि मौसम बदलता है तो यह बीमारी भी बढ़ती है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवाई और काउंसलिंग से बहुत तेजी से लाभ मिलता है।
