Moradabad: डीआईजी को घिरा देख अकेला छोड़कर लौट गए थे जिलाधिकारी

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। गांव असालतनगर बघा में युवती से छेड़खानी के आरोपित के घर छह जुलाई साल 2011 को पुलिस टीम दबिश देने पहुंची थी। तभी पुलिस पर महिलाओं ने धार्मिक ग्रंथ का अपमान करने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया था।

पुलिस के साथ मारपीट के साथ वर्दी भी फाड़ दी थी। सुबह मामला शांत हो गया था, लेकिन दोपहर में नमाज के बाद 02:30 बजे भीड़ इकट्ठा होना शुरू हुई। सपा नेता ने तूल देते हुए आस-पास के गांव के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काते हुए डींगरपुर के तिराहे पर बुला लिया और संभल-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया था। घंटा भर हंगामे के दौरान सड़क के बीचों बीच एक वाहन पलट दिया गया। सूचना मिलने पर तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार मौके पर पहुंची भीड़ को समझाने के प्रयास किया। कुछ देर बाद उग्र भीड़ ने मैनाठेर कोतवाली में तोड़फोड़ शुरू कर दी। इतना ही नहीं कोतवाली में खड़ी पुलिस जीप में आग लगा दी।

डींगरपुर तिराहे पर लोग हमलावर हो चुके लोग पुलिस से भिड़ गए थे। पुलिस टीम पर पथराव किया था। कुछ ने हवाई फायरिंग कर दी थी। गंभीरता को देखते हुए डीआईजी अशोक कुमार, डीएम राजशेखर मौके पर पहुंचे। भीड़ को समझाने के लिए डीआईजी भीड़ की ओर बढ़ गए और उग्र हो रही भीड़ के बीच पहुंच गए। जबकि डीएम पीछे ही रुके हुए थे। डीआईजी ने जब लोगों को समझाने का प्रयास किया तो उन्हें अकेला पाकर किसी ने भीड़ को उकसाया तो उन्हें घेर कर हमला कर दिया। डीआईजी पर हमला और खुद को घिरा देख डीएम टीम संग भाग निकले थे। उधर, डीआईजी के हमराह और एस्कार्ट भी भीड़ की उग्रता देख आगे बढ़ने के बजाय डीएम के काफिले के साथ निकल गए। इसके बाद उपद्रवियों ने डीआईजी व पुलिसकर्मियों को निशाना बना लिया। लाठी डंडों से डीआईजी की पिटाई की गई। डीआईजी ने पिस्टल निकालनी चाही तो पिस्टल छीन ली। जान बचाने के लिए डीआईजी पेट्रोल पंप के एक कमरे में घुस गए थे। भीड़ पेट्रोल पंप में बने कमरे का दरवाजा तोड़कर डीआईजी को बाहर निकालने का उतारू थी।

जान बचाने के लिए पेट्रोल पंप के कमरे में छिपे थे
डीआईजी को घेरने और मारपीट सूचना पूरे मंडल फैल चुकी थी। सूचना पाकर सीओ संभल और सीओ हसनपुर मौके पर पहुंचे भीड़ को फायरिंग कर तितर-बितर किया और घायल डीआईजी को पेट्रोल पंप के कमरे से निकाल कर उपचार के लिए मुरादाबाद लाया गया था। जान बचाने के लिए पेट्रोल पंप में छिपने से पूर्व ही उन्हें गंभीर चोट आई थीं। पुलिस की गाड़ी को आग लगाते हुए पीएसी के एक मिनी ट्रक को पहले पलटा और फिर कुछ मिनट बाद उसमें भी आग लगा दी।

33 आरोपियों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी, एक था नाबालिग
पुलिस ने डीआईजी के पीआरओ रवि कुमार के शिकायती पत्र के आधार पर 33 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर की थी। जिसके बाद इस मामले की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर संभल राजेश कुमार चौधरी को सौंपी थी। एक अक्टूबर 2011 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। सुनवाई के बाद सोमवार को कोर्ट ने मंजूर अहमद निवासी डींगरपुर, मोहम्मद अली, हाशिम निवासी ललवारा मैनाठेर, मोहम्मद कमरुल, मोहम्मद मुजीफ निवासी मसेबी रसूलपुर मैनाठेर, मोहम्मद यूनुस, रिजवान निवासी लालपुर मैनाठेर, अम्बरीश पुतत्र अनवर निवासी शाहपुर चमारान, कासिम निवासी परियावली असमोली संभल, मोहम्मद मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन निवासी बरखेड़ा डिडौली अमरोहा, मोहम्मद मुजीब, तहजीब आलम निवासी असदपुर मैनाठेर, जाने आलम निवासी मिलक नवाब मैनाठेर, फिरोज निवासी ताहरपुर मैनाठेर और मोहम्मद नाजिम निवासी असदपुर मैनाठेर को दोषी करार दिया। मामले की सुनवाई के दौरान दो की मौत हो गई और एक नाबालिग है। ऐसे में उसकी फाइल अलग कर दी गई।

सपा सरकार में वापस हुए थे मुकदमे
इस प्रकरण में कुंदरकी के कद्दावर नेता का नाम था। आरोप था कि उकसावे पर ही भीड़ उग्र हुई थी और बवाल किया था। बाद में सपा सरकार आने पर आरोपी नेता सहित कई आरोपियों के नाम मुकदमे में से वापस लिए गए थे।

कई दिन बाद मिली थी पिस्टल
छीनी गई पिस्टल लगभग एक महीने बाद पुलिस ने बरामद की थी। मामले में बताया गया था पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों से पिस्टल बरामद की थी। इस मामले में संभल के पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क मध्यस्थता कर रहे थे और उन्हीं के प्रयास से पिस्टल बरामद हुई बताई जा रही थी।

इन धाराओं में दर्ज की गई थी प्राथमिकी
147, 148, 149, 307, 332, 353, 436, 336, 457, 395, 397 सहित लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम एवं आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोप तय किए गए थे। पुलिस विवेचना के बाद वर्ष 2011 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। न्यायालय ने कुल 19 आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लिया था।

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