Bareilly : पीछे बैठने वाली नहीं...अब खुद ड्राइवर बनी नारी शक्ति
बरेली, अमृत विचार। शहर के व्यस्त चौराहों से लेकर गलियों में स्कूटी और कार की स्टेयरिंग थामे महिलाओं का आत्मविश्वास एक नए सामाजिक बदलाव की गवाही दे रहा है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़े इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि महिलाएं केवल पीछे बैठने वाली सवारी नहीं, बल्कि अपनी मंजिल खुद तय करने वाली ''पायलट'' बन चुकी हैं।
परिवहन विभाग के ताजा आंकड़े इस बदलाव की तस्दीक कर रहे हैं। साल 2022-23 में मात्र 730 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर उसे प्राप्त किया था, वहीं 2023-24 में यह संख्या मामूली गिरावट के साथ 528 रही। लेकिन इसके बाद जो रफ्तार पकड़ी , उसने सबको चौंका दिया। साल 2024-25 में यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 1,122 तक पहुंच गया। साल 2025-26 के आंकड़ों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां 1,580 महिलाओं ने आधिकारिक तौर पर वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया है।
इसी समयावधि में 19,204 पुरुषों ने भी लाइसेंस बनवाए हैं। आरटीओ प्रशासन पंकज बताते हैं कि इस बदलाव के पीछे केवल उत्साह नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और आधुनिक सिस्टम की भूमिका भी अहम है।ड्राइविंग टेस्ट की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को सौंपी गई है, जहां सेंसर युक्त ऑटोमेटेड ट्रैक और इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के जरिए मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए महिलाएं पूरी तैयारी और उचित प्रशिक्षण के साथ टेस्ट देने पहुंच रही हैं।
शौक नहीं जरूरत है डीएल
सड़कों पर फर्राटा भरती महिलाओं का यह ''क्रेज'' केवल शौक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा और स्वावलंबन से जुड़ा मामला है। कामकाजी महिलाओं से लेकर कॉलेज जाने वाली युवतियों तक के लिए अब अपना वाहन होना और उसे चलाने का कानूनी अधिकार (डीएल) होना एक अनिवार्य जरूरत बन गया है। प्रशासन की ओर से भी लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि जोखिम भरा भी है।
