‘कवच’ से लैस की जाएंगी पूर्वोत्तर रेलवे, चरणबद्ध तरीके से रूटों और लोको शेड में किया जाएगा स्थापित

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचारः पूर्वोत्तर रेलवे में यात्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अप्रैल से ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली लगाने का काम शुरू किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक तकनीक के लिए रेलवे प्रशासन ने 213 कवच सिस्टम आवंटित किए हैं। इनको चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग रूटों और लोको शेड में स्थापित किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहले सीतापुर-बुढ़वल रेलखंड पर इस प्रणाली को विकसित किया जाएगा। 

इसके साथ ही बाराबंकी से छपरा तक टावर लगाने का कार्य तेजी से जारी है। उम्मीद है कि अगले छह महीनों में इस पूरे सेक्शन पर ट्रायल शुरू हो जाएगा। लगभग 438 किलोमीटर लंबे बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा रेलमार्ग को कवच प्रणाली से लैस करने की योजना है। गोरखपुर से बस्ती के बीच करीब 20 टावर पहले ही लगाए जा चुके हैं।

आवंटित 213 कवच उपकरणों में से गोरखपुर लोको शेड को 60, गोंडा लोको शेड को 95 और सैदपुर लोको शेड को 58 सिस्टम दिए गए हैं। इससे विभिन्न ट्रेनों में इस तकनीक को तेजी से लागू किया जा सकेगा।

कैसे काम करता है ‘कवच’ सिस्टम

कवच प्रणाली ट्रेनों के बीच संभावित टक्कर को पहले ही भांप लेती है। खतरे की स्थिति में यह सिस्टम स्वतः ब्रेक लगा देता है और पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद अन्य ट्रेनों को भी रोक देता है। यह ब्रेक, हॉर्न और थ्रोटल जैसी गतिविधियों की निगरानी करता है। यदि लोको पायलट से कोई गलती होती है, तो पहले ऑडियो-वीडियो अलर्ट जारी होता है और रेड सिग्नल पार करते ही ट्रेन अपने आप रुक जाती है। कवच प्रणाली लागू होने से ट्रेन हादसों की संभावना में भारी कमी आएगी। यह तकनीक भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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