Lucknow News: छह बडे़ अस्पतालों की जांच कर साधी समिति ने चुप्पी

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Published By Muskan Dixit
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निजी अस्पतालों की क्रिटिकल केयर यूनिट में दूसरी विधा के चिकित्सकों के संचालन का मामला

लखनऊ, अमृत विचार: निजी अस्पतालों की क्रिटिकल केयर यूनिट भगवान भरोसे है। क्रिटिकल केयर यूनिट एमबीबीएस के बजाय दूसरी विधा के डॉक्टर संचालित कर रहे हैं। इसे लेकर विधान मंडल की महिला एवं बाल विकास समिति ने डीजी को निर्देश देकर जांच कराने के निर्देश दिए थे। सीएमओ ऑफिस के अफसरों ने पांच से छह बड़े अस्पतालों का निरीक्षण कर रिपोर्ट डीजी को भेजकर चुप्पी साध ली। मामला ठंडे बस्ते में पहुंच गया है। वहीं छोटे व मझोले अस्पतालों में समिति झांकने तक नहीं गई। ऐसे में मरीजों की सेहत संग खिलवाड़ हो रहा है।

शहर में करीब एक हजार से निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इसमें करीब छह सौ अस्पतालों में क्रिटिकल केयर यूनिट का संचालन हो रहा है। कागजों पर क्रिटिकल केयर यूनिट संचालन के लिए एमबीबीएस डॉक्टर लगे हैं मगर यूनिट दूसरी विधा के डॉक्टर चला रहे हैं। उप्र विधानमंडल की महिला एवं बाल विकास संबंधी बैठक में निजी अस्पतालों की क्रिटिकल केयर यूनिट की जांच कराने के निर्देश डीजी हेल्थ को दिए थे। डीजी ने सीएमओ लखनऊ डॉ. एनबी सिंह को जांच कराकर रिपोर्ट मांगी थी। सीएमओ ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित किया था। कमेटी के हर सदस्य को अलग-अलग इलाके का प्रभारी बनाकर निजी अस्पतालों की जांच कराई जानी थी। अफसरों ने पांच छह बड़े अस्पतालों की जांच करके रिपोर्ट डीजी हेल्थ को भेजकर मामले को निपटा दिया। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कई निजी अस्पतालों की जांच कराई गई थी। वहां पर कुशल विशेषज्ञ मिले थे।

निरीक्षण में मिलते दूसरी विधा के डॉक्टर

बड़े निजी अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो छोटे अस्पतालों में रिकार्ड में एमबीबीएस डॉक्टर दर्ज हैं मगर मौके पर आयुर्वेद-यूनानी के डॉक्टर मरीजों को इलाज करते मिलते हैं। नर्सिंग होम के नोडल डॉ. एपी सिंह व डॉ. संदीप सिंह ने दुबग्गा इलाके के दस अस्पतालों में छापा मारा था। इसमें दो अस्पताल अवैध मिले थे। जबकि आठ अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर तक नहीं मिले। अफसरों ने नोटिस थमाई और फिर मामले में सांठगांठ कर दबा गए।

छह माह पहले बनी थी कमेटी

सीएमओ ने निजी असपतालों की जांच के लिए छह माह पहले कमेटी बनाई थी। इसमें डॉ.एपी सिंह, डॉ. निशांत निर्वाण, डॉ. रवि पांडेय, डॉ. केडी मिश्रा, डॉ. संदीप सिंह शामिल हैं। पांच सदस्यीय कमेटी छह माह में महज 16 अस्पतालों का निरीक्षण किया था। जिसमें दस अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर तक नहीं मिले थे।

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