जिंदगी को जी भरकर जीना है

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

नौकरी से रिटायरमेंट अपने साथ अकेलापन लेकर आता है। कुछ लोग इसे स्वीकार कर लेते हैं और कुछ निकल पड़ते हैं खुशियां बिखेरने के लिए। बरेली के कुछ रिटायर ‘नौजवानों’ ने जिंदगी को जी भरकर जीने का फैसला किया। उन्होंने देशभर के ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों के लोगों को भी अपनी मंडली में शामिल किया और बनाया एक ऐसा अनूठा ग्रुप, जो हर संडे के तीसरे पहर सुरों की महफिल सजाते हैं।

वायरल तस्वीर (16)

इंटरनेट के पंखों पर सवार यह ‘सुरीले नौजवान’ जूम के जरिए अपने-अपने घरों से जुड़ते हैं। मजेदार बात यह है कि हर प्रोग्राम की एक थीम होती है। कभी सिर्फ साहिर के लिखे गीत गाए जाते हैं, तो कभी सिर्फ मन्ना डे के गाए गाने। अहम यह भी है कि इस ग्रुप में आधी संख्या महिलाओं की है। ग्रुप में अमेरिका और आस्ट्रेलिया से भी मेंबर हैं। इस ग्रुप का नाम है गा लो-मुस्कुरा लो।

कब बना ग्रुप

वह 21 अप्रैल 2021 का दिन था। कोविड के खौफ भरे दिन। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद के बीच अकेले और खामोश दिन। सभी अपने-अपने घरों में कैद। तनाव भरे इन पलों में अरुण कुमार शर्मा के जेहन में ख्याल आया कि क्यों न एक ग्रुप बनाया जाए, जिसमें सभी लोग ऑनलाइन जुड़ें और गीत-संगीत की महफिल सजाई जाए। उन्होंने यह विचार पत्नी कंचन शर्मा को बताया। वह तैयार हो गईं। अरुण शर्मा बैंक ऑफ बड़ौदा में चीफ मैनेजर थे और अब रिटायर हो गए हैं। फोन पर यह बात उन्होंने अपने दोस्त अशोक कुमार सक्सेना को बताई। अशोक कुमार डाकघर में प्रवर अधीक्षक थे और वह भी रिटायर हो गए हैं। उन्हें भी ख्याल जंच गया। उसी दिन सभी जूम ऐप के जरिए ऑनलाइन जुड़े और सजा ली संगीत संध्या। पहले प्रोग्राम में सात लोग थे, लेकिन दूसरा आयोजन अपने साथ निराशा लाया।

वायरल तस्वीर (18)

सदस्यों की संख्या बढ़ने के बजाए घटकर दो रह गई। आज ग्रुप में 150 सदस्य हैं, जिनमें एक्टिव मेंबर 70 के आसपास हैं। ज्यादातर रिटायर्ड लोग हैं। बरेली के अलावा लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, मुंबई, बीकानेर, इंदौर के साथ ही अमेरिका और आस्ट्रेलिया से लोग शामिल होते हैं। बरेली से तकरीबन 25 लोग इस ग्रुप में हैं। अब ग्रुप को रजिस्टर्ड भी करा लिया गया है और इसका नाम हो गया है ‘गा लो-मुस्कुरा लो’ वेल्फेयर सोसायटी। यह सोसायटी वेल्फेयर के काम भी करती है। इसके अध्यक्ष अशोक कुमार सक्सेना और सचिव अरुण कुमार शर्मा हैं। श्री शर्मा कहते हैं कि पत्नी कंचन शर्मा के बिना यह आयोजन हो पाना संभव नहीं है। उनका बराबर का सहयोग रहता है। 

कैसे होता है आयोजन 

वायरल तस्वीर (17)

इसका आयोजन हर संडे को शाम चार बजे होता है और रात आठ बजे तक चलता है। टीम ने वाट्सऐप पर एक ग्रुप बना रखा है। प्रोग्राम में शामिल होने वाले साथी रविवार को दोपहर दो बजे तक अपना नाम और गाना ग्रुप में भेज देते हैं। अरुण शर्मा इसे कोआर्डिनेट करते हैं और एक लिस्ट बनाते हैं। फिर पौने चार बजे तक सभी जूम ऐप पर ऑनलाइन जुड़ जाते हैं और अपने क्रम के हिसाब से गीत पेश करते हैं। खास बात यह है कि गीत के साथ संगीत भी होता है। इसके लिए एक ऐप का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें डूइट भी गाते हैं। अब तक इसके 289 प्रोग्राम हो चुके हैं। 

हर बार नया बैकग्राउंड

हर प्रोग्राम का एक नया बैक ग्राउंड होता है। इसे अरुण शर्मा खुद डिजाइन करते हैं। इसमें थीम के हिसाब से बैकग्राउंड होता है। ऊपर की तरफ थीम का नाम और नीचे उस दिन की तिथि और सन। जैसे साहिर लुधियानवी के स्पेशल प्रोग्राम की डिजाइन में उनकी एक तस्वीर थी और कुछ म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट। इसे रिकॉर्ड में भी रखा जाता है।

यूट्यूब चैनल भी 

ग्रुप का अपना यूट्यूब चैनल भी है। हर संडे को होने वाले प्रोग्राम की बाकायादा रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की जाती है। उस वीडियो को सभी मेंबरों को भेजने के साथ ही यूट्यूब पर भी अपलोड किया जाता है। 

ऑफलाइन भी होता है प्रोग्राम

ग्रुप हर तीसरे महीने मंच पर भी प्रोग्राम का आयोजन करता है। इसमें ग्रुप से बाहर के लोग भी शिरकत करते हैं। यह काफी लोकप्रिय आयोजन है। इसे हर तीसरे महीने आयोजित किया जाता है। अब तक इसके 19 आयोजन हो चुके हैं। 

बरेली की नीरा जुड़ती हैं अमेरिका से

नीरा इस ग्रुप की एक्टिव मेंबर हैं। वह डेढ़ साल से इस ग्रुप से जुड़ी हैं। नीरा यहां बिहारीपुर में रहती थीं। उनके पिता दिवंगत रघुवीर नारायण मेहरोत्रा तिलक इंटर कॉलेज में टीचर थे। नीरा ने साहूराम स्वरूप महिला डिग्री कॉलेज से संगीत (गायन) में पीएचडी की है। शादी के बाद वह अमेरिका चली गईं। उन्होंने बताया कि उन्हें संडे का बेसब्री से इंतजार रहता है। उस वक्त अमेरिका में सुबह का वक्त रहता है। इस प्रोग्राम में शामिल होकर उनका पूरा दिन संगीतमय हो जाता है। 

आस्ट्रेलिया से जुड़ते हैं अरविंद 

अरविंद वर्मा पटना के हैं। बरेली उनकी ससुराल है। वह बरेली में स्टेट बैंक में मैनेजर थे। बरेली में सात साल रहे। बाद में आस्ट्रेलिया जा बसे। उन्हें भी इस प्रोग्राम की प्रतीक्षा रहती है। वह एक साल से इस ग्रुप से जुड़े हैं। वह आमतौर पर मन्ना डे, किशोर कुमार, तलत महमूद और हेमंत कुमार को गाना पसंद करते 
हैं। 

संगीत ने खालीपन किया दूर

ग्रुप के अध्यक्ष अशोक कुमार सक्सेना ने बताया कि अरुण शर्मा के प्रोत्साहन से अब उन्होंने भी गाना शुरू किया है। इससे पहले उन्होंने कभी सार्वजनिक तौर पर गाने के बारे में सोचा भी नहीं था। वह कहते हैं, “संगीत ने रिटायरमेंट के खालीपन को भर दिया।” वह बरेली में सुरेश शर्मा नगर में रहते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रुप में बहुत सारी ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने पतियों के प्रोत्साहन से अब गाना शुरू किया है। 

फिजी रेडियो में गाते थे नीरज

नीरज टंडन बरेली के बैंक ऑफ बड़ौदा में एजीएम हैं। वह और उनकी पत्नी नीतू टंडन भी बराबर प्रोग्राम में शरीक होते हैं। नौकरी के सिलसिले में वह कई देशों में रहे हैं। वह बीओबी की फिजी ब्रांच में भी रहे। इस दौरान उन्होंने रेडियो फिजी में काफी प्रोग्राम किए। वह वहां गीत प्रस्तुत किया करते थे। इसे काफी पसंद किया जाता था। सिंगिंग उनका बचपन का पैशन है।-कुमार रहमान, बरेली