खोज: ऐसे हुआ एलपीजी का आविष्कार

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

बीसवीं सदी की शुरुआत में पेट्रोल सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि एक बड़ी पहेली भी था। उस दौर में इसे संभालना आसान नहीं था- जरा-सी लापरवाही और पेट्रोल हवा में उड़ जाता। भंडारण और परिवहन के दौरान इसका तेजी से वाष्प में बदल जाना ईंधन विक्रेताओं के लिए भारी नुकसान और खतरनाक हादसों की वजह बन रहा था।

कंटेनरों के अंदर बनने वाली गैसें कभी भी विस्फोट का कारण बन सकती थीं। इसी समस्या ने अमेरिकी वैज्ञानिक वाल्टर स्नेलिंग को सोचने पर मजबूर किया। 1910 में उनकी जांच एक साधारण शिकायत से शुरू हुई। एक ग्राहक ने बताया कि घर पहुंचते-पहुंचते उसका आधा पेट्रोल गायब हो गया। यह सुनकर स्नेलिंग ने पेट्रोल के व्यवहार को समझने का फैसला किया। 

अपने प्रयोगों में उन्होंने पाया कि पेट्रोल के भीतर प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसें मौजूद होती हैं, जो सामान्य तापमान पर तेजी से उड़ जाती हैं। जहां बाकी लोग इन्हें बेकार समझते थे, वहीं स्नेलिंग ने इन्हें एक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने साधारण उपकरणों की मदद से इन गैसों को अलग किया और दबाव में लाकर तरल रूप में बदल दिया।

यहीं से जन्म हुआ एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस का। स्नेलिंग ने पाया कि यह गैस न केवल आसानी से जलती है, बल्कि खाना पकाने, हीटिंग और रोशनी के लिए बेहद उपयोगी भी है। 1912 में इसका पहला घरेलू उपयोग हुआ और 1913 में उन्होंने इस प्रक्रिया का पेटेंट भी करवा लिया। आज एलपीजी दुनियाभर में रसोई से लेकर उद्योगों तक हर जगह इस्तेमाल हो रही है। एक छोटी-सी समस्या से शुरू हुई यह खोज आज करोड़ों लोगों की जिंदगी आसान बना रही है।

वैज्ञानिक के बार में

वायरल तस्वीर (33)

वाल्टर ओ. स्नेलिंग का जन्म 1880 में अमेरिका में हुआ था। वे पेशे से रसायनशास्त्री थे और ईंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किए। उन्होंने हार्वर्ड, येल और जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की। 1907 में उन्होंने पानी के नीचे डेटोनेटर का आविष्कार किया, जो पनामा नहर निर्माण में अमेरिकी सरकार को सालाना 5 लाख डॉलर बचाने में सहायक रहा। 1910 में यूएस ब्यूरो ऑफ माइंस के विस्फोटक प्रयोगशाला के प्रमुख बने। उन्होंने विस्फोटकों पर 179 पेटेंट कराए। उनका निधन 1965 में हुआ।