बॉलीवुड की वो अदाकाराएं, जो यादों में हैं जिंदा
हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने सीमित अवसरों के बावजूद अपनी अदाकारी और प्रतिभा से अमिट छाप छोड़ी। विनीता भट्ट उर्फ यास्मीन और नृत्यांगना शीला वाज इसी परंपरा की दो महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। यास्मीन ने ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ जैसे गीतों में अपनी चंचलता से दर्शकों को आकर्षित किया, वहीं शीला वाज ने ‘रमैया वस्तावैया’ जैसे गीतों में अपने नृत्य से यादगार पहचान बनाई। भले ही इन्हें मुख्यधारा में लंबा समय न मिला हो, लेकिन इनकी स्क्रीन उपस्थिति और कलात्मक योगदान ने इन्हें सिनेमा प्रेमियों के बीच आज भी जीवंत बनाए रखा है।– डॉ. मीता गुप्ता
5.jpg)
विनीता भट्ट, जिन्हें यास्मीन के नाम से भी जाना जाता है, 1950 के दशक में भारतीय सिनेमा में एक छोटी, लेकिन यादगार पहचान थीं, जिन्हें ‘मिस्टर एंड मिसेज़ 55’ (1955) और ‘ऊटपटांग’ (1955) जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। उनकी विरासत कुछ यादगार रोल्स पर टिकी है, खासकर जॉनी वॉकर के साथ मजेदार ‘जाने कहां मेरा जिगर गया जी’ गीत, जिसने यास्मीन की शोख अदाओं और आकर्षक अंदाज़ को क्लासिक बॉलीवुड के शौकीनों के बीच आज भी जिंदा रखा है|
विनिता भट्ट (यास्मीन) का जन्म 3 अप्रैल, 1937 को रावलपिंडी में हिंदू-अंग्रेज़ माता-पिता के यहां हुआ था। उन्होंने हिल-स्टेशन स्कूलों में पढ़ाई की और बैंगलोर में अपना सीनियर कैम्ब्रिज पूरा किया। वे बैंगलोर एमेच्योर ड्रामेटिक सोसाइटी में शामिल हुईं और टैगोर के बलिदान और जे. बी. प्रीस्टली जैसे नाटकों में काम किया, शायद यहीं उनके एक महान अदाकारा बनाने का अंकुर फूटा| मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक गुरुदत्त ने उन्हें देखा और अपनी अगली फिल्म में रोल ऑफर किया और उनसे बॉम्बे आने को कहा। कुछ वजहों से, उन्होंने यह ऑफर एक्सेप्ट नहीं किया। बाद में विनीता बॉम्बे गईं, जहाँ उनकी मुलाकात एक्ट्रेस नरगिस के भाई अनवर हुसैन से हुई। विनीता का परिवार अनवर हुसैन को जानता था।
क्योंकि विनीता बहुत खूबसूरत थीं, इसलिए अनवर हुसैन ने उन्हें रंजीत स्टूडियो के मालिक चंदूलाल शाह से मिलवाया, जिन्होंने उन्हें फिल्म ‘ऊटपटांग’ (1955) में एक छोटा सा रोल दिया। फिल्म की शूटिंग मशहूर महबूब स्टूडियो में हुई थी। गुरु दत्त भी वहीं शूटिंग कर रहे थे। दोनों रेस्ट पीरियड में मिले। फिर से गुरु दत्त ने उन्हें अपनी फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ में रोल ऑफर किया। इस बार वे मना नहीं कर सकीं और ऑफर एक्सेप्ट कर लिया। बहुत ही खूबसूरत और चार्मिंग यास्मीन को गुरुदत्त ने अपनी सुपरहिट फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ में जॉनी वॉकर के साथ साइड हीरोइन के तौर पर चुना था। गुरुदत्त ने फिल्म मिस्टर एंड मिसेज 55 के लिए विनीता बट का नाम बदलकर यास्मीन कर दिया था। पॉपुलर गाना ‘जाने कहां मेरा जिगर गया जी’ यास्मीन और जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया।
उस समय फिल्मियाटन की सिनेमास्कोप और टेक्नीकलर फिल्म ‘थ्री हेडेड कोबरा’ आई थी, जिसका पहले नाम ‘बॉम्बे फ्लाइट 417’ था। विनीता भट्ट ने इस फिल्म में रुक्मिणी का रोल किया था, जिसके मेकअप मैन जिमी वाइनिंग थे। दोनों को प्यार हो गया। अपनी अच्छी शुरुआत, जिनमें रुस्तम सोहराब, कैप्टन किशोर जैसी फिल्मों के बावजूद, विनीता भट्ट फिल्मों में ज्यादा दिन नहीं टिकीं और पॉपुलर मेकअप मैन जिमी वाइनिंग से शादी कर ली और बॉलीवुड छोड़कर विदेश में बस गईं। आज भी वे बॉलीवुड के इतिहास में पुरानी यादों की एक मिसाल बनी हुई हैं एक ऐसी एक्ट्रेस जो थोड़े समय के लिए चमकीं, लेकिन अपनी ज़िंदादिल स्क्रीन प्रेज़ेंस से एक गहरी छाप छोड़ गईं।
बेजोड़ नृत्यांगना शीला
अपनी नृत्य भंगिमाओं से सबको प्रभावित करने वाली शीला वाज़ ने 1953 से 1960 तक हिंदी फिल्मों में डांसर के रूप में काम किया। उनका परिवार गोवा से था और उनका जन्म 1934 में हुआ था और वे दादर, मुंबई में पली-बढ़ीं। उन्होंने छोटी उम्र से ही डांस सीखा था, लेकिन जब उन्होंने फिल्मों में आना चाहा, तो उन्हें अपने परिवार से बहुत विरोध का सामना करना पड़ा। किशोर साहू की मयूर पंख (1954) और किदार शर्मा की गुनाह (1953) के साथ, उन्होंने 1960 तक बहुत सारी फिल्मों में डांस किया। उनकी कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों में श्री 420 (1955) शामिल है, जिसमें उन्होंने न केवल रमैया वस्तावैया (उनका अब तक का सबसे प्रसिद्ध गीत) पर यादगार नृत्य किया, बल्कि दिल का हाल सुने दिलवाला, सीआईडी (1956), जॉनी वॉकर (1957), तुमसा नहीं देखा (1957), मिस्टर एक्स (1957), सोलवां साल (1958), कागज़ के फूल (1959) और बहना (1960) में भी नृत्य किया।
बहुत से लोग उन्हें नाम से नहीं जानते, क्योंकि उन दिनों डांसर्स के नाम हमेशा फिल्म क्रेडिट्स में नहीं आते थे, लेकिन इससे हर गाने को खास बनाने के लिए इन डांसर्स के योगदान या कड़ी मेहनत को कम नहीं किया जा सकता। शीला वाज़ कई मशहूर गानों से जुड़ी हुई हैं और इन गानों से जुडने के उनके चेहरे हमारे दिमाग में बस गए हैं। अगर शीला को याद करना है, तो रमैया वस्तावैया को मिस नहीं किया जा सकता। मशहूर जोहरा सहगल का कोरियोग्राफ किया हुआ यह गाना वर्ली सी फेस में शूट किया गया था, उस समय उस जगह पर ऊंची इमारतें और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स नहीं थे। आज का बॉम्बे-वर्ली सी लिंक उसी जगह पर बना है। गाने में उनकी एक मिनट की स्क्रीन प्रेजेंस के बावजूद, कोई उनके एक्सप्रेशन और परफॉर्मेंस को नहीं भूल सकता।
लेके पहला पहला प्यार में भी, देव आनंद और शकीला के साथ स्क्रीन शेयर करने के बावजूद, शीला सबसे अलग दिखती हैं। यहां तक कि यूट्यूब वीडियो के कमेंट सेक्शन में भी लोग उनकी तारीफ़ कर रहे हैं, और बता रहे हैं कि कैसे मोहम्मद रफ़ी, शमशाद बेगम और आशा भोसले का गाना उनके डांस से अमर हो गया।
बॉलीवुड की हिंदी-केंद्रिक फ़िल्ममेकिंग की वजह से, शीला वाज़ को नुकसान हुआ-उन्हें यह भाषा नहीं आती थी। इसलिए, उनके डांस के लिए, उन्हें रोमन स्क्रिप्ट में लिखे लिरिक्स दिए जाते थे। उन्होंने लगभग 70 फ़िल्मों में काम किया| शुरुआत शोखियां (1951) में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर उनके काम से हुई, और फिर माँ (1952) में एक पूरा नंबर किया।
1961 में बॉलीवुड छोड़ने और अपना नाम बदलकर राम लखनपाल रखने के बावजूद, शीला को इंडस्ट्री में अपने समय को याद करना बहुत पसंद था। 2009 में उनका इंटरव्यू लेने वाले फिल्म मेकर करण बाली लिखते हैं, “उनका चेहरा खिल उठा, जब उन्होंने हमें बताया कि आज भी जब उनके गाने टीवी पर दिखाए जाते हैं, तो यंगस्टर्स और पड़ोसी उनके पास आते हैं और बताते हैं कि उन्हें उनके डांस कितने पसंद आए!” इस महान अदाकारा का देहांत 29 जून 2022 को हुआ, किंतु उनके नृत्य ने उन्हें अमर बना दिया| हिंदी फिल्मों के दो गानों में अभिनय करने वाली हीरोइनें अपनी शानदार अदाकारी से अमर हो गईं। उन्होंने बाद में कोई बड़ी फिल्म तो नहीं की, लेकिन सिर्फ इन गानों की वजह से वह जानी जाती हैं।
