पौधे भी देते हैं कीटों के हमलों का जवाब, CSIR-CIMAP के अध्ययन में सामने आए नए तथ्य
मार्कण्डेय पाण्डेय/लखनऊ, अमृत विचार : पेड़-पौधे भी सुख-दुख का अनुभव करने के साथ दोस्त-दुश्मन की पहचान करते हैं और हमलावर कीटों के खिलाफ जवाबी हमला करते हैं। सीएसआईआर-सीमैप में किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि पौधों की इस क्षमता को बढ़ाकर कीटों के प्रभाव को कम या खत्म किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि कीटों के आक्रमण का सबसे प्रभावी मुकाबला अश्वगंधा करता है। बीटल के हमले के दौरान यह अपने मेटाबोलिज्म में बदलाव कर सुरक्षात्मक यौगिकों का निर्माण बढ़ा देता है, जिससे कीटों के जीवित रहने की संभावना घट जाती है।
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अश्वगंधा (वीथेनिया सोम्निफेरा) पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि कीटों के हमले के बाद पौधे में कई रासायनिक बदलाव होते हैं। पौधा वीथानोलाइड्स और वीथानोसाइड्स जैसे यौगिकों की मात्रा बढ़ाकर अपनी रक्षा करता है। ये यौगिक न केवल पौधे को सुरक्षा देते हैं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। शोध का केंद्र हेनोसेपीलाचना वीजींटोक्टोपंक्टाटा नामक कीट रहा, जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि कीटों के हमले से कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व प्रभावित होते हैं, जबकि सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पौधे का रक्षा तंत्र मजबूत होता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि ये रसायन कीटों के शरीर में भी पहुंच जाते हैं और उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालते हैं। यह शोध भविष्य में कीट-प्रतिरोधी फसलों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
