लखनऊ स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: किसान हॉस्पिटल पर लगेगा जुर्माना, युवक की मौत के बाद एक्शन

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Published By Anjali Singh
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- बिना पंजीकरण अस्पताल में भर्ती किया गया मरीज, मौत के बाद खुली पोल, जुर्माना जमा न होने तक अस्पताल संचालन रोकने की तैयारी

लखनऊ, अमृत विचार: दुबग्गा के किसान हॉस्पिटल में बिना पंजीकरण मरीज भर्ती किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। जांच में खुलासा हुआ कि जिस समय मरीज को भर्ती किया गया था, उस वक्त अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं था। अब क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अफसरों ने साफ किया है कि जुर्माना कोषागार में जमा न होने तक अस्पताल संचालन पर रोक लगाई जाएगी।

मामला हरदोई के बघौली थाना क्षेत्र के मढरिया खेड़ा गांव निवासी महेश के बेटे सूरज (18) की मौत से जुड़ा है। हादसे में पैर जख्मी होने के बाद परिजन पहले हरदोई के एक निजी अस्पताल पहुंचे थे, जहां से दलाल ने उन्हें दुबग्गा स्थित किसान हॉस्पिटल भेज दिया।

परिजनों के मुताबिक, सूरज को 13 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन ऑपरेशन वहीं करने के बजाय दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया। ऑपरेशन के बाद दोबारा किसान हॉस्पिटल में भर्ती किया गया और इस दौरान परिजनों को मरीज से मिलने तक नहीं दिया गया। आरोप है कि इलाज में लापरवाही के चलते 15 अप्रैल की सुबह सूरज की मौत हो गई।

परिजनों की शिकायत पर नर्सिंग होम सेल के नोडल डॉ. एपी सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। जांच में सामने आया कि अस्पताल संबंधित अवधि में बिना पंजीकरण संचालित हो रहा था। अब विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है। डॉ. एपी सिंह का कहना है कि अस्पताल पर जल्द जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

मां हॉस्पिटल पर भी मेहरबानी के आरोप

उधर, माल क्षेत्र स्थित मां हॉस्पिटल को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यहां बच्चे के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया था। जांच में सीएचसी प्रभारी डॉ. जेपी सिंह ने अस्पताल का पंजीकरण न होने की रिपोर्ट भेजी थी।

आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों और अस्पताल संचालक की मिलीभगत से तीन दिन के भीतर अस्पताल का पंजीकरण करा दिया गया और जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इतना ही नहीं, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत लगने वाला 50 हजार रुपये का जुर्माना भी नहीं वसूला गया। अवैध रूप से संचालित अस्पताल को वैध बनाकर संचालन की अनुमति देने के आरोप अब विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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