Uttrakhand: कारागार कैदियों से ओवरलोड, जेल की व्यवस्थाएं रहीं डोल

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। हल्द्वानी स्थित उप कारागार बंदियों और कैदियों की संख्या से ओवरलोड है। यही वजह है कि जेल में अकसर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उप कारागार हल्द्वानी में कैदियों की बढ़ती संख्या अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जेल अपनी निर्धारित क्षमता से करीब डेढ़ गुना अधिक बंदियों को समेटे हुए है, जिससे व्यवस्थाओं और सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव साफ दिखाई दे रहा है।

हालात यह हैं कि इस असामान्य भार का असर जेल की आंतरिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बैरकों में तय सीमा से अधिक कैदी होने के चलते सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिसके लिए पुलिस और जेल प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। इतना ही नहीं जेल प्रशासन इन कैदियों को बीमारी से बचाने समेत उनके खाने, सोने की पर्याप्त व्यवस्था बनाने की दरियादिली से पीछे नहीं हट रहा।

दरअसल, जिले के सितारगंज में सेंट्रल जेल है। इसके अलावा कहीं जेल नहीं होने के कारण अपराधियों को हल्द्वानी कारागार भेजा जाता है। इसको देखते हुए किच्छा के रजपुरा गांव में अत्याधुनिक जेल बनाने का फैसला किया गया था। सिंचाई विभाग ने 26 जुलाई 2021 को निर्माण शुरू किया, जिसे बाद में बंद करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, नैनीताल जनपद के लिए निर्मित इस उप कारागार की कुल क्षमता 675 बंदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहां डेढ़ हजार कैदी व बंदी रखे गए हैं।

इसमें सबसे अधिक संख्या ऊधमसिंह नगर से स्थानांतरित कैदियों की है। बताया जा रहा है कि नैनीताल जनपद के लगभग 256 बंदी यहां निरुद्ध हैं, क्षमता के अनुरूप हैं, लेकिन ऊधमसिंह नगर से आए करीब 800 से अधिक कैदियों के कारण जेल पूरी तरह भर चुकी है। ऊधमसिंह नगर में सितारगंज स्थित केंद्रीय और खुली जेल होने के बावजूद कुमाऊं क्षेत्र में कोई और बड़ी जेल न होने से वहां के बंदियों को हल्द्वानी भेजा जा रहा है।जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार का कहना है कि क्षमता से अधिक कैदियों के कारण कुछ दिक्कतें जरूर आती हैं, लेकिन उपलब्ध संसाधनों के भीतर रहते हुए जेल मैनुअल के अनुसार सभी बंदियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

महिला बैरक में मासूमों की मौजूदगी
हल्द्वानी: जेल में इस समय 38 महिला बंदी हैं, जिनके साथ चार छोटे बच्चे भी रह रहे हैं। ये सभी बच्चे तीन वर्ष से कम आयु के हैं, जिनमें दो बालक और दो बालिकाएं शामिल हैं। दिसंबर माह में एक महिला बंदी ने जेल में ही बच्चे को जन्म दिया था।

30 करोड़ से ज्यादा फूंकने के रोका जेल का काम
हल्द्वानी : किच्छा के रजपुरा गांव में 40 एकड़ जमीन पर 2580 कैदियों और बंदियों के लिए हाईटेक जेल का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन शासन के सितंबर 2023 में जेल का निर्माण रोक दिया गया। यह जेल लगभग आधे से अधिक बनकर तैयार हो चुकी थी और इस पर 30 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया जा चुका था। अधिकारिक रूप से निर्माण कार्य रोके जाने की वजह साफ नहीं की गई, लेकिन इतना तो साफ है कि अगर इस जेल का निर्माण पूरा होता और जेल हैंडओवर कर दी जाती तो कई जेलों का बोझ कम हो जाता।

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