Moradabad: छात्रवृति के चार करोड़ रुपये लौटाए, मची खलबली, आठ हजार बच्च प्रभावित
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है, जहां निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई 2009) के तहत करीब आठ हजार बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति अब तक उनके खातों में नहीं पहुंच सकी है। लगभग चार करोड़ रुपये की यह धनराशि समय रहते वितरित करने के बजाय 31 मार्च 2026 को सरेंडर कर दी गई।
शिकायतकर्ता आकांक्षा भारती की ओर से दी गई शिकायत में निजी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को पाठ्य पुस्तक और यूनिफॉर्म के लिए प्रति छात्र पांच हजार की दर से धनराशि दी जानी थी, लेकिन चार महीने पहले फंड मिलने के बावजूद इसका भुगतान नहीं किया गया। रिपोर्ट में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश का यह बयान भी सामने आया है कि जिन बच्चों को पैसा नहीं मिल सका, उन्हें अगले सत्र में दिया जाएगा। इसे विभागीय विफलता की स्वीकारोक्ति माना जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर दो बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि उनके पुत्र, जो एक निजी विद्यालय में कक्षा सात में पढ़ते हैं, को छात्रवृत्ति नहीं मिली। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद न तो अधिकारी मिलते हैं और न ही फोन उठाया जाता है। जिला समन्वयक पर भी अभद्र व्यवहार और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। जबकि आरईटी अधिनियम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा में सहायता देना है, लेकिन इस तरह की लापरवाही अधिनियम की मूल भावना पर सवाल खड़े करती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें बच्चों की संख्या, भुगतान की स्थिति, बकाया कारण, तथा चार करोड़ की धनराशि सरेंडर करने के निर्णय का पूरा विवरण देना होगा। यह भी निर्देश दिए हैं कि लंबित भुगतान वाले बच्चों की पहचान कर जल्द समाधान किया जाए और आरटीई शिकायतों के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
