एसआईआर: बरेली की राजनीत में होगा उलटफेर, बनेंगे जीत-हार के रिकॉर्ड

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। वोटों के नए समीकरण बरेली की राजनीति में बड़े परिवर्तन का कारण बन सकते हैं! एसआईआर-2026 के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आगे जीत-हार के और भी कड़े मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां मीरगंज में भाजपा की सबसे बड़ी जीत हुई थी फरीदपुर में सपा को बहुत मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। अब हर सीट पर जुड़े 20 से 25 हजार नए मतदाता नया इतिहास लिखने को तैयार नजर आ रहे हैं ।

आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 तक बरेली में मतदाताओं की कुल संख्या 29,48,987 पहुंच चुकी है, जिसमें अकेले 16.09 लाख से अधिक पुरुष और 13.39 लाख से अधिक महिला मतदाता शामिल हैं। इस बार पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अकेले फॉर्म-6 (नए मतदाता) के 2,64,672 दावों को स्वीकार किया गया है। मतदाताओं की इस भारी वृद्धि का सीधा असर बिथरी चैनपुर (3,70,974 वोटर) और भोजीपुरा (3,63,479 वोटर) जैसी सीटों पर पड़ेगा, जहां अब जीत-हार का गणित पूरी तरह बदल चुका है। बहेड़ी, नवाबगंज और बरेली कैंट जैसी सीटों पर भी मतदाताओं की संख्या में उछाल आया है। पिछले चुनावों के रिकॉर्ड खंगाले जाएं तो कई सीटों पर हार-जीत का फैसला महज पांच से दस हजार वोटों के बीच रहा था। 

ऐसे में जब 2026 की रनभूमि सजेगी, तो नए 2.57 लाख से अधिक वोटर्स और 50 हजार युवा चेहरे तय करेंगे कि बरेली की राजनीति में किसका कद बढ़ेगा और किसका रिकॉर्ड टूटेगा। नया आंकड़ा उन दिग्गजों के लिए भी चेतावनी है जो पिछली जीत के अंतर को आधार मानकर चल रहे थे। साफ है कि इस बार ''''वोटों का नया गणित'''' बड़े-बड़े सूरमाओं का खेल बिगाड़ने वाला है। ऐसे में आगामी चुनाव के लिए पार्टियों को अभी से डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ और मजबूत करनी होगी। भाजपा, सपा और कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों के रणनीतिकार इन आंकड़ों का बूथ-वार विश्लेषण कर रहे हैं। चर्चा है कि आगामी चुनावों में टिकट बंटवारे में भी उन प्रत्याशियों को वरीयता दी जा सकती है जिनकी छवि युवाओं के बीच लोकप्रिय हो और जो रोजगार व आधुनिक बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर स्पष्ट विजन रखते हों।

राजनीति पर आधी आबादी का दिखेगा प्रभाव
जिले की राजनीति में इस बार महिला मतदाता किसी भी दल का समीकरण बनाने-बिगाड़ने का दम रखती हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनपद में महिला मतदाताओं की संख्या 13,39,606 तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि जेंडर रेशियो (लिंगानुपात) में भी सुधार दर्ज किया गया है, जो ड्राफ्ट पब्लिकेशन के समय 815 था और अब बढ़कर 832 हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिलाएं अक्सर ''''साइलेंट वोटर'''' की भूमिका निभाती हैं। ऐसे में जिस भी दल की योजनाएं और सुरक्षा वादे महिलाओं को प्रभावित करेंगे, वह सत्ता की सीढ़ी आसानी से चढ़ सकेगा।

एक बार निर्णायक भूमिका निभाएंगे युवा
आगामी चुनाव में 18-19 आयु वर्ग के 50,281 युवा मतदाता पहली बार वोट डालेंगे, जो किसी भी विधानसभा सीट पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ये वो मतदाता हैं जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और पारंपरिक राजनीति के बजाय विकास, रोजगार और शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं।युवाओं का यह फ्रेश वोट बैंक राजनीतिक दलों को अपनी पुरानी रणनीति बदलकर नए और आधुनिक वादे करने पर मजबूर करेगा।

 

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