मेरठ से शुरू होगा नया 'आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन', अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर बोला तीखा हमला

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊः हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मेरठ की सेंट्रल मार्केट में सरकार की तरफ से की गई सीलिंग की कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा है कि देश में एक नए "आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन" की शुरुआत मेरठ से हो सकती है।

सोमवार को सोशल मीडिया के जरिये अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक 1857 की क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह मेरठ ने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, उसी तरह अब यह शहर आर्थिक नीतियों के खिलाफ जनआंदोलन का केंद्र बन सकता है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियाँ किसानों, छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नुकसानदायक साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, कुछ कानूनों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के जरिए सरकार पारंपरिक व्यापार और खेती को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की इन नीतियों का लाभ बड़े उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारी हाशिए पर जा रहे हैं। सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि अब व्यापारी वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है और धीरे-धीरे यह वर्ग सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जो बड़े व्यापारी अभी तक सरकार का समर्थन कर रहे हैं, वे भी भविष्य में इन नीतियों से प्रभावित होंगे। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चंदा और कमीशन के जरिए कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ रही है।

अखिलेश यादव ने "बुलडोजर राजनीति" पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इसका असर केवल मकानों और दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो देश आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मेरठ कभी अन्याय के सामने नहीं झुका है और न ही आगे झुकेगा। व्यापारी, किसान और उद्यमी मिलकर इस कथित आर्थिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे और एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकते हैं। 

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