अलविदा आशा ताई  : आशा भोसले का मुरादाबाद क्षेत्र के भिंडी संगीत घराने से रहा जुड़ाव

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। पार्श्व गायिका और स्वर मल्लिका आशा भोसले के निधन की खबर ने जहां पूरे देश को भावुक किया, वहीं मुरादाबाद में इसका असर कुछ अलग ही देखने को मिला। इसकी वजह सिर्फ उनकी महान गायकी नहीं, बल्कि शहर से जुड़ा उनका वह सांस्कृतिक रिश्ता है, जिसे यहां के कलाकार अपनी विरासत का हिस्सा मानते हैं।

मुरादाबाद-भिंडी संगीत घराने से जुड़े इस संबंध ने शहर के संगीत प्रेमियों को आशा भोसले से एक आत्मीय जुड़ाव दिया। डॉ. विनीत गोस्वामी ने बताया कि इस घराने के संस्थापक मूल रूप से मुरादाबाद के बिजनौर क्षेत्र के निवासी थे, जो बाद में मुंबई जाकर बस गए और वहां इस परंपरा को आगे बढ़ाया। इसी संगीत परंपरा के उस्ताद अमन अली खान और उनके शिष्य मास्टर नवरंग से आशा भोसले ने संगीत की प्रारंभिक बारीकियां सीखी थीं। यह जुड़ाव केवल एक तथ्य नहीं, बल्कि मुरादाबाद की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। आशा भोसले की गायकी में जो शास्त्रीयता की गहराई और लय की पकड़ दिखाई देती है, उसमें इस घराने की परंपरा की झलक साफ महसूस होती है।

मुरादाबाद के संगीत जगत में इस बात की चर्चा रही कि किसी वैश्विक पहचान रखने वाली कलाकार का संबंध जब अपने शहर की परंपरा से जुड़ता है, तो वह स्थानीय संस्कृति के लिए गर्व का विषय बन जाता है। यह जुड़ाव नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहा है, जो संगीत की शिक्षा के दौरान इस विरासत को समझने और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। संगीत शिक्षिका बाल सुंदरी तिवारी ने कहा कि आशा भोसले ने हर पीढ़ी को अपने गीतों से जोड़ा। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर किसी के पास उनका कोई न कोई पसंदीदा गीत है।

संगीत शिक्षक आदर्श भटनागर ने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान उनकी एक शिष्या ने मुंबई में आशा भोसले को देखो कोई दिल न टूटे गीत गाते हुए सुना था। उस प्रस्तुति का असर ऐसा रहा कि बाद में उसी गीत को सीखने और समझने की प्रेरणा मिली। रविवार को शहर में माहौल ऐसा रहा, जहां लोग केवल उनके गीतों को याद नहीं कर रहे थे, बल्कि इस बात को भी महसूस कर रहे थे कि मुरादाबाद की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका था। बाबू मुकुट बिहारी लाल जैन सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार जैन का कहना है कि उनकी मधुर, सजीव और भावपूर्ण आवाज़ ने पीढ़ियों के हृदय को स्पर्श किया और हर गीत को अमरता प्रदान की। उनकी कला, साधना और संगीत के प्रति समर्पण सदैव हमारे लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

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