सोशल फोरम : आशा और दीदी
लता जी को ज़िंदगी में बेशुमार यश मिला, उनका नाम सदा इज़्ज़त से लिया गया। पर आशा जी की कहानी तो मसालों भरी थी न। पिता दीनानाथ मंगेश्कर के जाने के बाद मंगेशकर फ़ैमिली के सिर आर्थिक दुश्वारियां तो आई हीं। लता जी तब 15-16 साल की ही तो थीं, जब उनको घर संभालने के लिए इंडस्ट्री में उतरना पड़ा।
वहीं बड़ी बहन से चार साल छोटी आशा भोसले भी तब मात्र 16 साल की थीं, जब लता जी के 36 वर्षीय सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी करने के लिए उन्होंने घर ही छोड़ दिया। जिस साल इतने बवाल के बाद शादी हुई, उसी साल पहला बेटा हेमंत भी हो गया! आनन-फानन की गई शादी कब रोज़ के लफड़े-झगड़े में बदल गई, आशा ताई को अंदाज़ा न हुआ।
1955 के आसपास ज़िंदगी में ओपी नय्यर के रूप में उन्हें जो म्यूज़िक डायरेक्टर मिला, वो किसी देवता से कम क्या लगता होगा! लेकिन म्यूजिक स्टूडियो के देवता के बाद घर पर पति के रूप में जो था, उससे रिश्ता कमज़ोर होने लगा। भोसले, आशा जी को काम करते नहीं देख पा रहा था।
मात्र 10 साल चली इस शादी से जब तीसरी औलाद होने को थी, तब डोमेस्टिक अब्यूज़ से परेशान होकर आशा ताई लौट आईं अपने घर और फिर कभी मुड़कर नहीं गईं, लेकिन तब के समय में शादी तोड़ने के बाद जो प्रताड़ना मिली होगी उन्हें, उसका आइडिया भी नहीं होगा आज किसी को।
शायद ये भी एक वजह थी कि लता और आशा के बीच प्रेम नगण्य होने लगा था। पर अंधेरी रात की सुबह ओपी के संग हुई, तो 15 साल चली, पर आखिर यहां भी रिश्तों में ब्रेक लगने ही थे, क्योंकि ओपी पहले से शादीशुदा थे, सो ब्रेक लगे... आशा जी ने ओपी के साथ जो आखिरी गीत रिकार्ड किया था, उसके बोल बड़े दिलचस्प थे– ‘चैन से हमको कभी, आपने जीने न दिया, ज़हर भी चाहा अगर, पीना तो पीने न दिया’
ओपी नय्यर पर ज़बरदस्त किताब लिख चुके पराग डिमरी साहब बताते हैं कि इस गाने की रिकॉर्डिंग में आशा जी फूट-फूटकर रोईं कि तब जो स्टूडियो से निकलीं तो फिर कभी ओपी से नहीं मिलीं।
फिर उनका साथ पंचम दा के साथ बनने लगा था। 1980 में आशा ताई ने पंचम दा से शादी कर ली। धीरे-धीरे लता जी से भी उनके रिश्ते सुधरने लगे। क्या इत्तेफाक़ है कि चार साल पहले, लता जी भी 92 वर्ष की आयु में शरीर से मुक्त हुई थीं, आज आशा ताई की उम्र भी 92 वर्ष ही थी, जब उनका देहावसान हुआ।
- फेसबुक वाल से
