पंचकोश आधारित पाठ्यक्रम से गढ़े जाएंगे नौनिहाल, NEP के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार, खेल-गतिविधि आधारित सीखने पर जोर
शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित विकास की दिशा में बड़ा कदम
लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार बालवाटिका को केवल प्रारंभिक शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित कर रही है। 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा गया है।
इस पाठ्यक्रम में अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोष की अवधारणा को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से जोड़ा गया है। इसके तहत शारीरिक, भाषा एवं साक्षरता, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक तथा सौंदर्यबोध विकास को केंद्र में रखा गया है। इससे बच्चों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इस नई व्यवस्था के लिए ‘चहक’, ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी पुस्तकों और गतिविधि आधारित सामग्री विकसित की है। इनमें वर्कबुक, चित्रकथा, संख्या ज्ञान, कला और संगीत से जुड़ी सामग्री शामिल है, जो खेल और अनुभव आधारित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा देती है।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के हर पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें।
पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता और सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें उनकी लगभग 85 प्रतिशत क्षमताएं विकसित होती हैं। ऐसे में यह समग्र और गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम भविष्य में सकारात्मक परिणाम देने वाला साबित होगा।
