अंजा रिंगग्रेन लोवेन: एक मानवतावादी महिला की कहानी

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Published By Anjali Singh
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अंजा रिंगग्रेन लोवेन एक डेनिश मानवतावादी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें नाइजीरिया में ‘विष्ट बच्चे’ (व्हिच चिल्ड्रेन) के रूप में आरोपित बच्चों को बचाने और उनकी पुनर्वास के लिए जाना जाता है। वे लैंड ऑफ होप नामक चैरिटी संगठन की संस्थापक हैं, जो पहले ‘दिन नॉधजेल्प’ (एक डेनिश नाम है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-आपकी आपातकालीन सहायता) के नाम से जाना जाता था। उनका जन्म 4 सितंबर, 1978 को डेनमार्क के फ्रेडरिकशावन शहर में हुआ था। अंजा ने न केवल हजारों बच्चों की जिंदगियां बचाई हैं, बल्कि अफ्रीकी समाज में अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कहानी प्रेरणा का स्रोत है, जो दिखाती है कि एक व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति कैसे विश्व स्तर पर बदलाव ला सकती है।

    प्रारंभिक जीवन और शिक्षा- अंजा का बचपन डेनमार्क के एक छोटे से शहर में बीता, जहां वे अपनी मां, बड़ी बहन और जुड़वां बहन के साथ रहती थीं। उनके पिता शराबी थे और मां की असमय मृत्यु ने उनके जीवन को गहरा आघात पहुंचाया। इससे वे अवसाद, चिंता और एनोरेक्सिया जैसी समस्याओं से जूझीं। 1998 में उन्होंने फ्रेडरिकशावन जिम्नेजियम से शिक्षा पूरी की। उसके बाद वे मध्य पूर्व की यात्रा पर गईं और इजरायल के एक किबुट्ज में रहीं, जहां उन्होंने सामुदायिक जीवन का अनुभव प्राप्त किया।

2001 में उन्होंने मर्स्क एयर के साथ स्टूअर्डेस (हवाई जहाज में महिला केबिन क्रू) के रूप में प्रशिक्षण लिया, लेकिन अपनी मां की टर्मिनल बीमारी के कारण नौकरी छोड़ दी। मां की मृत्यु के बाद वे खुदरा क्षेत्र में काम करने लगीं और आरहूस शहर में एक स्टोर मैनेजर बनीं। यह अवधि उनके जीवन की चुनौतियों से भरी थी, लेकिन इन्होंने ही उनकी मानवतावादी यात्रा की नींव रखी।


   मानवतावादी कार्यों की शुरुआत- अंजा का मानवतावादी सफर 2008 में तब शुरू हुआ, जब उन्होंने ब्रिटिश डॉक्यूमेंट्री ‘व्हिच चिल्ड्रेन’ देखी, जिसमें नाइजीरिया में जादू-टोने के आरोप में बच्चों पर होने वाले अत्याचारों को दिखाया गया था। इन बच्चों को परिवार और समाज द्वारा त्याग दिया जाता है, उन्हें यातनाएं दी जाती हैं या यहां तक कि जिंदा जला दिया जाता है। यह दृश्य अंजा के बचपन के सपने, अफ्रीका में काम करने के सपने को साकार करने के लिए प्रेरणा बना। 2009 में उन्होंने डेनिश नेशनल चर्च एड के लिए मलावी में तीन महीने का पर्यवेक्षक कार्य किया, जहां उन्होंने एक स्कूल के नवीनीकरण के लिए धन जुटाया। इसके बाद तंजानिया में एक स्कूल बनाने में मदद की। 2012 में, आरहूस में सेल्सपर्सन की नौकरी छोड़कर, उन्होंने डीआईएनएनोदहजेल्प की स्थापना की। अपनी सारी संपत्ति बेचकर उन्होंने नाइजीरिया में ‘विष्ट बच्चों’ को बचाने का संकल्प लिया। 2013 में वे पूर्णकालिक रूप से इस कार्य में लग गईं।


   लैंड ऑफ होप की स्थापना - 2014 में अंजा ने नाइजीरियाई कानून छात्र डेविड इम्मानुएल उमेम के साथ मिलकर अफ्रीकन चिल्ड्रेंस एड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन की सह-स्थापना की। उन्होंने अकवा इबोम राज्य मंन तीन एकड़ जमीन खरीदी और इंजीनियर्स विदाउट बॉर्डर्स की मदद से लैंड ऑफ होप चिल्ड्रेंस सेंटर का निर्माण किया। यह केंद्र पश्चिम अफ्रीका का सबसे बड़ा ऐसा केंद्र है, जिसमें 100 बच्चों के लिए आवास, अस्पताल, व्यावसायिक स्कूल और कृषि भूमि शामिल है। यहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलता है, शिक्षा दी जाती है, स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती है और अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

संगठन का उद्देश्य न केवल बचाव है, बल्कि बच्चों को उनके परिवारों में पुनर्स्थापित करना भी है। अंजा और उनकी टीम ने अब तक सैकड़ों बच्चों को बचाया है, जो पहले सड़कों पर भटकते या यातनाएं झेलते थे। वे स्थानीय समुदायों में शिक्षा के माध्यम से अंधविश्वासों को समाप्त करने पर काम करती हैं। केंद्र में रहने वाले 95 बच्चे अब स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और कई को उनके परिवारों में वापस लौटाया जा चुका है।

प्रमुख उपलब्धियां

अंजा के कार्यों को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिसमें सम्मिलित हैं-

2016- ओओओएम मैगजीन द्वारा ‘दुनिया की सबसे प्रेरणादायक व्यक्ति’।
2016- नील्स एबेसन मेडल।
2017- पॉल हैरिस फेलोशिप और होप अवॉर्ड।
2017- डेन ऑफ द ईयर के लिए नामांकन।
2023- रेड क्रॉस ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड।

उन्हें दलाई लामा द्वारा ‘हीरो’ घोषित किया गया है। उनके कार्यों पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बनी हैं, जैसे हेल्वेडेस हेल्टे, अंजा ओग हेक्सेबोर्नेने और हेक्सेनकिंडर इन नाइजीरिया (जर्मनी, 2018)। अंजा डेनमार्क की सबसे मांग वाली वक्ताओं में से एक हैं, जहां वे अपनी कहानी, बलिदान और नाइजीरिया के अंधविश्वासों पर व्याख्यान देती हैं।-रूफिया खान

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