UP: सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद-मदरसा जमींदोज, संभल के मुबारकपुर बंद चला बुलडोजर 

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Published By Monis Khan
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संभल/ओबरी। संभल जनपद में सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार तेज हो रहा है। बिछौली गांव में इमामबाड़ा और ईदगाह पर कार्रवाई के बाद शुक्रवार को असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में मदरसे और मस्जिद पर ताबड़तोड़ बुलडोजर एक्शन किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 40 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया गया, जबकि मस्जिद के शेष ढांचे को भी ध्वस्त कर दिया गया।

राजस्व प्रशासन की टीम सुबह करीब 8:30 बजे नायब तहसीलदार और राजस्व कर्मियों के साथ भारी पुलिस बल लेकर गांव पहुंची। सबसे पहले सरकारी भूमि पर बने मदरसे को बुलडोजर से ढहाया गया। इसके बाद मस्जिद परिसर को खाली कराया गया और अंदर रखे धार्मिक सामान को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके पश्चात मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसडीएम निधि पटेल और तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरे अभियान की निगरानी करते रहे।

मस्जिद की मीनार को गिराने के लिए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती। पहले एक व्यक्ति को मीनार पर चढ़ाकर रस्सी बांधी गई, जिसके बाद दो बुलडोजर और दो हाइड्रा मशीनों की मदद से मीनार को नियंत्रित तरीके से गिराया गया। दूसरी ओर दो बुलडोजर मस्जिद के मुख्य ढांचे को तोड़ने में लगाए गए। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के मकानों को एहतियातन खाली कराया गया। गांव में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पीएसी, रैपिड रिएक्शन फोर्स और दो थानों की पुलिस तैनात की गई। इसके अलावा पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों से भी की गई।
पैमाइश में खुला था सरकारी जमीन पर मस्जिद-मदरसा बनाने का खेल

संभल। 28 मार्च को प्रशासन द्वारा 1150 वर्ग मीटर सरकारी भूमि की पैमाइश कराई गई थी, जिसमें करीब 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में मदरसा, मस्जिद, पांच दुकानें और एक मकान बना पाया गया था। इसके बाद संबंधित पक्ष को 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था।

नोटिस के बाद मदरसे और दुकानों के कुछ हिस्सों को संबंधित लोगों द्वारा स्वयं ही हटाया गया, लेकिन शेष निर्माण को हटाने के लिए प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। ग्रामीणों की ओर से भी अवैध निर्माण हटाने के लिए अपने स्तर से मशीन लगाने की मांग की गई थी। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और न्यायालयीय आदेशों के आधार पर की जा रही है। जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इसी प्रकार अभियान जारी रहेगा।

कड़ी सुरक्षा में चला ध्वस्तीकरण, तीन थानों की फोर्स तैनात

जनपद संभल के मुबारकपुर बंद गांव में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद, मदरसा, दुकानों और मकान को हटाने की कार्रवाई से पहले प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही गांव में तीन थानों की पुलिस के साथ पीएसी और रैपिड रिएक्शन फोर्स के जवानों की तैनाती कर दी गई थी। जिस स्थान पर बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही थी, वहां आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई, ताकि कोई दुर्घटना या अव्यवस्था न हो। 

प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के मकानों की छतों पर भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, जिससे पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा सके। इसके साथ ही संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त फोर्स लगाकर स्थिति को नियंत्रण में रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए यह एहतियाती कदम उठाए गए। प्रशासन पूरे समय हालात पर नजर बनाए रहा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने दी।

स्कूल की छुट्टी कर दी, बिजली आपूर्ति भी कराई गई बंद
मुबारकपुर बंद गांव में मस्जिद पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आसपास के स्कूलों की छुट्टी कराई गई और बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। बताया गया कि जिस स्थान पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी थी, उसके दोनों ओर सरकारी स्कूल स्थित हैं। सुबह के समय स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं चल रही थीं और बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। 

ऐसे में प्रशासन ने स्थिति का आकलन करते हुए दोपहर में कार्रवाई शुरू होने से पहले ही स्कूलों की छुट्टी कराकर सभी बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया। इसके साथ ही क्षेत्र से गुजर रही बिजली लाइन की आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद करा दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाईटेंशन लाइन चालू रहती तो बुलडोजर कार्रवाई के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रह सकती थी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या दुर्घटना से बचा जा सके ।

 

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