प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में पहली बार ईवीएआर तकनीक से एओर्टिक एनीयुरिज्म का सफल इलाज
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएनएमसी) एवं स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में पहली बार एंडोवैस्कुलर एनीयुरिज्म रिपेयर (ईवीएआर) तकनीक से एओर्टिक एनीयुरिज्म का सफल उपचार किया गया। इस उपलब्धि से अब प्रयागराज और आसपास के मरीजों को जटिल इलाज के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार कौशांबी निवासी कंधई लाल (73) आठ अप्रैल को सीने, पेट और पीठ में तेज दर्द की शिकायत लेकर कार्डियोलॉजी विभाग पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच सामान्य रही, लेकिन विस्तृत परीक्षण में एओर्टा में खतरनाक एनीयुरिज्म की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने बताया कि यह स्थिति कभी भी जानलेवा साबित हो सकती थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी, सर्जरी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की गई।
वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक सचदेवा ने बताया कि पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय आधुनिक ईवीएआर तकनीक का उपयोग किया गया, जिसमें बिना बड़ा चीरा लगाए जांघ के माध्यम से स्टेंट ग्राफ्ट डालकर कमजोर धमनी को मजबूत किया गया। इससे एनीयुरिज्म रक्त प्रवाह से अलग हो गया और उसके फटने का खतरा समाप्त हो गया।
उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया कुछ घंटों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई और मरीज की हालत अब स्थिर है। वह सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडेय ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब ऐसे जटिल मामलों के लिए मरीजों को लखनऊ या दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
चिकित्सकों ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु, उच्च रक्तचाप या धूम्रपान करने वाले लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए और अचानक पेट या पीठ में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इस बीच स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के कार्डियक कैथ लैब में भी पहली बार बिना ओपन हार्ट सर्जरी के 21 वर्षीय युवक के हृदय में मौजूद 6 मिमी के छेद (VSD) को सफलतापूर्वक बंद किया गया। इसे प्रयागराज मंडल में इस प्रकार का पहला मामला बताया गया है।
