Bareilly: ई एविडेंस खाकी का अचूक हथियार, कानूनी मोर्चे पर करेगा नैया पार
संजय शर्मा, बरेली। क्राइम सीन से लेकर इन्वेस्टीगेशन तक ‘ई-साक्ष्य’ प्रणाली पुलिस के लिए वरदान साबित होने लगी है। सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगना लगभग बंद हो गए हैं। पीड़ित और आरोपी पक्ष के बयान तक डिजिटल एविडेंस के रूप में सीधे एप पर अपलोड हो रहे हैं और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी भी बना रहे हैं, बल्कि कानूनी मोर्चे पर न्याय की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
अफसरों का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता बनने के बाद ई साक्ष्य प्रक्रिया ने पुलिसिंग की कई जटिलताओं को आसान करने का काम किया है। 7 साल से अधिक की सजा वाले अपराधों में इसे अनिवार्य किया गया है, ताकि सबूतों के साथ किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश बाकी न रहे। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पुलिस किसी भी घटना में मौके से जुटाए गए साक्ष्य को तुरंत सुरक्षित फॉर्म में अपलोड कर सकती है।
नई व्यवस्था के तहत अब मौके के वीडियो, फोटो और यहां तक कि धारा 161 के तहत दर्ज बयान भी ई-साक्ष्य के रूप में ऐप पर अपलोड किए जा रहे हैं। सभी रिकॉर्ड हमेश्सा रक्षित रहते हैं और उन्हें किसी भी तरह से बदला नहीं जा सकता। इस प्रणाली से न सिर्फ अनुसंधान पुलिसिंग को बल मिल रहा है, बल्कि तीव्र जांच के साथ पुलिस पर साक्ष्य बदलने या हेरफेर करने के आरोप नहीं लग रहे हैं। डिजिटल साक्ष्य कानूनी ट्रैक पर अधिक भरोसेमंद माने जा रहे हैं।
बरेली पुलिस अपराधों की स्थिति में ई-साक्ष्य जुटाकर एप पर अपलोड करने में जुटी है। जनवरी से अब तक थानों में जितने भी केस रजिस्टर हुए हैं, उनमें से 97 प्रतिशत ई-साक्ष्य के दम पर ही लिखे गए। नए दरोगाओं को ई-ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि इस आंकड़े को 100 प्रतिशत तक ले जाया जा सके।
बयान से नहीं मुकर पाएंगे वादी-प्रतिवादी
कितने ही मामलों में देखा जाता है कि वादी-प्रतिवादी पुलिस के सामने कुछ बयान देते हैं और बाद में कानूनी लड़ाई के समय कोर्ट में बयानों से पलट जाते हैं। ऐसा होने पर किरकिरी पुलिस की होती है। आरोप लगते हैं कि जबरन बयान लिए गए या सबूतों से छेड़छाड़ की गई। ई-साक्ष्यों का कवच पुलिस को इस टेंशन से मुक्ति दिला रहा है।
एसएसपी बरेली अनुराग आर्य ने बचाा कि जनवरी से अब तक बरेली पुलिस ने जितने भी केस दर्ज हुए, वे सभी ई-साक्ष्य पर अपलोड हुए सबूतों के हिसाब से किए गए हैं।। सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार साक्ष्य अपलोड होने के बाद क्लाउड में चला जाएगा, जिसे कभी भी निकाला जा सकता है। दूसरी बात पुलिस पर साक्ष्य से छेड़खानी करने के आरोप अब खत्म हो जाएंगे। एक बार जो लोड होगा, उसे बदला नहीं जा सकेगा।
