खेती में एआई और ड्रोन तकनीक से मिल रहा अधिक लाभ, 'विकसित कृषि-विकसित भारत @2047' की ओर बढ़ते यूपी के कदम
लखनऊ, अमृत विचार । उ.प्र. कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए जलवायु परिवर्तन, फसल रोग नियंत्रण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार और नवाचार पर काम किया जा रहा है। महानिदेशक, “विकसित कृषि–विकसित भारत @2047 के लिए कृषि में परिवर्तन” विषय पर संपन्न हो चुकी छठी कृषि विज्ञान कांग्रेस (8-10 अप्रैल 2026) की सिफारिशों एवं भविष्य की कार्ययोजना को लेकर प्रेस कांफ्रेंस संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान कांग्रेस में लगभग 700 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 350 छात्र एवं 350 वैज्ञानिक शामिल थे।
उपकार की प्रमुख उपलब्धियां
पिछले चार वर्षों में उपकार ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें काला नमक चावल की नई किस्मों का विकास तथा मक्के की हाइब्रिड किस्मों का उत्पादन प्रमुख हैं, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं। इस दौरान किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए उन्हें सीधे बाजारों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो।
एआई और ड्रोन का बढ़ता उपयोग
कृषि क्षेत्र में एआई और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और सटीक बनाया जा सके। कृषि समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंडलीय स्तर पर प्रयोगशालाएं स्थापित करने एवं कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है, जिससे वैश्विक तकनीकों का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच सके। हैदराबाद स्थित आईसीआरआईएसएटी के सहयोग से छात्रों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओस) के लिए मूल्यवर्धन एवं स्टार्टअप विकास पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में आईसीआरआईएसएटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी है।
पशुपालन और बागवानी में नवाचार
पशुपालन क्षेत्र में एआई का उपयोग पशुओं की बीमारियों, पोषण एवं दूध उत्पादन से संबंधित अनुसंधान में किया जा रहा है। वहीं बागवानी में शर्बती अमरूद की नई किस्म विकसित की गई है, जिससे किसानों को लाखों रुपये का लाभ मिल रहा है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर सर्वेक्षण
किसानों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए व्यापक आर्थिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है, ताकि नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कृषि विविधीकरण, आधुनिकीकरण एवं संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के मॉडल को अपनाया जाएगा।
गन्ना व अन्य फसलों के साथ समन्वय
गन्ने के साथ अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने तथा सीधे धान की बुवाई के लिए आधुनिक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
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