जेवर एयरपोर्ट पर उड़ानों को ‘सुरक्षा नियम’ का ब्रेक, CEO नागरिकता बना अड़ंगा, गृह मंत्रालय का सुरक्षा नियम में ढील से इनकार
लखनऊ, अमृत विचार: बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू होने में अब तकनीकी नहीं, बल्कि नीतिगत अड़चन सबसे बड़ी बाधा बन गई है। कागजों पर तैयार दिख रहा यह प्रोजेक्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक सुरक्षा नियम में उलझकर फिलहाल अधर में लटक गया है। दरअसल, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के 2011 के नियम के अनुसार, किसी भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भारतीय नागरिक होना जरूरी है, क्योंकि वही सुरक्षा समन्वयक की भूमिका निभाता है।
इसी नियम में ढील देने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया, जिसके बाद जेवर एयरपोर्ट की उड़ानों की समयसीमा फिर अनिश्चित हो गई है। जेवर एयरपोर्ट का संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रालि. कर रही है, जो स्विस कंपनी जुरिच एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक है। कंपनी के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन स्विस नागरिक हैं। यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ, क्योंकि नियम के तहत सुरक्षा समन्वयक के रूप में भारतीय नागरिक की अनिवार्यता तय है।
एयरपोर्ट को वाणिज्यिक संचालन शुरू करने के लिए सबसे अहम मंजूरी एयरड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम (एएसपी) की होती है, जो बीसीएएस जारी करता है। हालांकि तकनीकी रूप से एयरपोर्ट लगभग तैयार है और उसे डीजीसीए से एयरोड्रोम लाइसेंस भी मिल चुका है, लेकिन सीईओ की नागरिकता को लेकर सुरक्षा मंजूरी लंबित होने से एएसपी की स्वीकृति अटक गई है। इसका सीधा असर संचालन तैयारियों पर पड़ा है। एयरपोर्ट स्टाफ के एंट्री पास जारी नहीं हो पा रहे, एयरलाइंस अपनी योजना को अंतिम रूप नहीं दे पा रही हैं और यात्रियों के लिए उड़ान शुरू होने की कोई स्पष्ट तारीख सामने नहीं है।
एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारी यह भी मानते हैं कि क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उन्हें पूरी तरह हटाना कंपनी के लिए आसान फैसला नहीं होगा। यही वजह है कि बीच का रास्ता निकालने की कोशिश चल रही है। कंपनी ने यह तर्क भी दिया है कि प्रबंधन ढांचे में राज्य सरकार और नेएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. के अधिकारी भी शामिल हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस पर सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा समन्वयक का पद अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की ढील संभव नहीं है।
पीएम के उद्घाटन के बाद नहीं शुरू हुई उड़ानें
नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था और उम्मीद थी कि जल्द ही उड़ानें शुरू होंगी। लेकिन एक महीने बाद भी स्थिति जस की तस है, क्योंकि अंतिम सुरक्षा मंजूरी नहीं मिल सकी है। यह मामला अब केवल एक एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदेशी निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की बड़ी बहस को भी सामने ला रहा है। फिलहाल समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जब तक गृह मंत्रालय और बीसीएएस से अंतिम मंजूरी नहीं मिलती, जेवर एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत इंतजार में ही रहेगी।
क्या हैं विकल्प
• सीईओ पद पर भारतीय नागरिक की नियुक्ति
• सुरक्षा समन्वयक की भूमिका अलग अधिकारी को सौंपना
• नियमों में संशोधन की संभावनाएं (फिलहाल कम)
