UDID Card : कानपुर नगर यूडीआईडी कार्ड बनाने में प्रदेश में अव्वल, शाहजहांपुर को मिला दूसरा स्थान

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले ने यूडीआईडी (स्वावलंबन) कार्ड निर्माण में एक बार फिर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी अग्रणी स्थिति कायम रखी है। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी विनय उत्तम ने शुक्रवार को बताया कि 28 अप्रैल तक जिले में कुल 48,245 दिव्यांगजनों को विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी कार्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। 

राज्य स्तर की रैंकिंग में शाहजहांपुर 46,776 कार्ड के साथ दूसरे तथा हरदोई 43,411 कार्ड के साथ तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में कुल 16,94,099 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड निर्गत किए जा चुके हैं, जबकि महोबा और हापुड़ क्रमशः सबसे कम कार्ड जारी करने वाले जनपद रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में कानपुर नगर ने शाहजहांपुर को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया था, जिसके बाद से जनपद लगातार शीर्ष पर बना हुआ है। 18 जनवरी 2025 से 28 अप्रैल 2026 के बीच 8,266 नए यूडीआईडी कार्ड बनाए गए, जो उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। 

अधिकारी के अनुसार पूर्व में जहां प्रतिवर्ष केवल 800 से 1000 कार्ड ही बन पाते थे, वहीं अब विशेष शिविरों के आयोजन से इस कार्य में तेजी आई है। यूडीआईडी कार्ड के लिए स्वावलंबन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है तथा प्रत्येक सोमवार को कांशीराम अस्पताल (रामादेवी) और प्रत्येक बृहस्पतिवार को उर्सला अस्पताल (परेड) में दिव्यांग बोर्ड द्वारा परीक्षण के बाद कार्ड जारी किए जाते हैं। 

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर 18 जनवरी 2025 से प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में तहसील स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में आवेदन, चिकित्सकीय परीक्षण और प्रमाण पत्र वितरण की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी की जा रही है, जिससे दिव्यांगजनों को काफी सुविधा मिल रही है। 

इन शिविरों में दिव्यांगजनों को आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक खाता, एनपीसीआई मैपिंग, आधार संशोधन, दिव्यांग पेंशन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण, स्वरोजगार ऋण तथा विवाह प्रोत्साहन जैसी विभिन्न योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि इन नवाचारों के चलते न केवल जनपद यूडीआईडी कार्ड निर्गत करने में प्रदेश में अग्रणी बना है, बल्कि दिव्यांगजनों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिली है। 

संबंधित समाचार