स्वराज्य की कहानी, लेकिन अधूरी प्रभावशीलता
फिल्म राजा शिवाजी, छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और उनके “स्वराज्य” के विचार को बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। यह केवल एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि उनकी सोच, साहस और नेतृत्व को दर्शाने वाली एक सिनेमैटिक यात्रा है। निर्देशक रितेश देशमुख ने फिल्म को भव्यता और भावनात्मक गहराई के साथ पेश करने का प्रयास किया है। फिल्म का टोन गंभीर और प्रेरणादायक है, जिसमें शिवाजी महाराज की रणनीति और संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका विजुअल स्केल है।
सेट डिजाइन, लोकेशन, कॉस्ट्यूम और सिनेमैटोग्राफी मिलकर एक प्रभावशाली ऐतिहासिक माहौल बनाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी कई दृश्यों को और असरदार बनाता है। हालांकि, फिल्म की कमजोरी इसकी लंबाई और धीमी गति है। कई जगह कहानी खिंचती है और स्क्रीनप्ले में कसावट की कमी दिखती है।
कुछ सीन अनावश्यक रूप से लंबे और ज्यादा नाटकीय लगते हैं। रितेश देशमुख का अभिनय ईमानदार है, लेकिन कुछ दृश्यों में और प्रभाव की गुंजाइश थी। सलमान खान का कैमियो आकर्षक है। कुल मिलाकर, यह फिल्म भव्य और प्रेरणादायक है, जो शिवाजी महाराज की विरासत को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करती है, हालांकि बेहतर संपादन इसे और प्रभावशाली बना सकता था।
समीक्षक-प्रदीप शर्मा
भव्यता और फैंटेसी का कॉम्बो
मिथुन मैनुअल थॉमस की डायरेक्ट की हुई और जयसूर्या स्टारर मलयालम ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आडू 3: वन लास्ट राइड - पार्ट 1’ ZEE5 पर स्ट्रीमिंग के लिए अवेलेबल है। इस फ्रेंचाइजी का तीसरा पार्ट होने के कारण, जिसके बहुत बड़े फैन बेस हैं, फिल्म ने काफी चर्चा बटोरी है। इसने बॉक्स ऑफिस पर 120 करोड़ का बिजनेस किया है। आडू शब्द का मतलब बकरी है।
फ्रेंचाइजी के पहले पार्ट में, शाजी पपन (जयसूर्या) और उनकी टीम रस्साकशी के खेल में एक मैच जीतते हैं और विनर के तौर पर उन्हें एक बकरी गिफ्ट में मिलती है। बकरी और टीम के कैरेक्टर्स का कॉम्बिनेशन पहले पार्ट में एक जबरदस्त कॉमेडी देता है।
पहले पार्ट के बाद, शाजी पप्पन (जयसूर्या), अरक्कल अबू (सैजू कुरुप) और “ड्यूड” (विनायकन) के कैरेक्टर इंटरनेट कल्चर और मीम सर्कल में बहुत पॉपुलर हो गए। आडू 3 कॉमेडी से ज्यादा भव्यता और फैंटेसी को प्राथमिकता देती है। नो डाउट फिल्म हमें एंटरटेन करती हैं, लेकिन आडू फ्रैंचाइजी अपनी लगातार, रियलिस्टिक और मजेदार कॉमेडी के लिए जानी जाती है। 3 में इसकी कुछ कमी है।
फिल्म एक नॉन-लीनियर, मल्टी-टाइमलाइन अप्रोच का इस्तेमाल करती है, जो कैरेक्टर्स को 1700 के दशक में ले जाती है। आडू 3: वन लास्ट राइड- पार्ट 1’ को एक एम्बिशियस प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है, जो सीरीज की जानी-मानी टाइट, कैओटिक कॉमेडी से ज्यादा भव्यता को प्राथमिकता देता है। अगर आप इन कैरेक्टर्स के डाई-हार्ड फैन हैं, तो यह फिल्म आपको एक नॉस्टैल्जिक एक्सपीरियंस दे सकती है।
