यूपी में कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति: सख्त निगरानी से नकली-मानकहीन उत्पादों पर लगेगी लगाम

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Published By Anjali Singh
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-357 कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति से दवा गुणवत्ता जांच को मिलेगी नई रफ्तार -18 लैब होंगी संचालित, विश्लेषण क्षमता 12 हजार से बढ़कर 54,500 नमूने प्रतिवर्ष

लखनऊ, अमृत विचार: कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति से दवा और कास्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता जांच अधिक प्रभावी होगी। इनका प्रमुख कार्य औषधि एवं कास्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के तहत विभिन्न जनपदों से एकत्रित नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण करना है। इससे दवाओं की शुद्धता, प्रभावशीलता और मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित होगी। साथ ही नकली, मिलावटी और मानकहीन उत्पादों की पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।

प्रदेश में जनस्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अंतर्गत चयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) को नियुक्ति पत्र वितरित करने से प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रणाली को नई गति मिलेगी। कनिष्ठ विश्लेषकों की नियुक्ति से दवा और कास्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता जांच अधिक प्रभावी होगी।

इनका प्रमुख कार्य औषधि एवं कास्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के तहत विभिन्न जनपदों से एकत्रित नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण करना है। इससे दवाओं की शुद्धता, प्रभावशीलता और मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित होगी। साथ ही नकली, मिलावटी और मानकहीन उत्पादों की पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे बाजार में उपलब्ध उत्पादों पर सख्त निगरानी स्थापित होगी और आम जनता को सुरक्षित व भरोसेमंद दवाएं मिल सकेंगी।

प्रदेश में औषधि परीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब प्रत्येक मंडलीय मुख्यालय पर आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित कर कुल 18 लैब को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। पहले केवल 5 प्रयोगशालाओं के माध्यम से जांच कार्य होता था, जिससे क्षमता सीमित थी। अब नई नियुक्तियों के बाद सभी प्रयोगशालाएं पूर्ण क्षमता से कार्य करेंगी, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबित मामलों में कमी होगी।

चार गुना से अधिक बढ़ेगी परीक्षण क्षमता

नई भर्तियों के बाद प्रदेश की परीक्षण क्षमता काफी बढ़ जाएगी। पहले जहां प्रतिवर्ष लगभग 12 हजार नमूनों की जांच होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 54,500 नमूने प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगी। इससे न केवल जांच की गति तेज होगी, बल्कि व्यापक स्तर पर दवाओं और कास्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी भी संभव हो सकेगी। समयबद्ध जांच से संदिग्ध और मानकहीन उत्पादों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

पारदर्शी भर्ती से सभी वर्गों को मिला अवसर

इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 357 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 143 अनारक्षित, 75 अनुसूचित जाति, 6 अनुसूचित जनजाति, 97 अन्य पिछड़ा वर्ग और 36 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं। पूरी चयन प्रक्रिया मेरिट आधारित, निष्पक्ष और पारदर्शी रही, जिसमें किसी प्रकार की सिफारिश या हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रही।

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