यूपी में कागजों में सिमटा संचारी रोग नियंत्रण अभियान, लाखों के बजट के बावजूद जागरूकता नदारद
लखनऊ, अमृत विचार : डेंगू, मलेरिया, टीबी, हैजा, चिकनगुनिया, एड्स, पीलिया, हेपेटाइटिस, फ्लू और रैबीज जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए चलाया गया विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान इस बार भी जमीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो सका। स्वास्थ्य विभाग समेत 13 विभागों की संयुक्त भागीदारी वाला यह अभियान अधिकतर स्थानों पर सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आया। कहीं भी स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों के कर्मचारी दिखाई नहीं दिए।
''अमृत विचार'' की पड़ताल में सामने आया कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अधिकतर लोगों को इस अभियान की जानकारी तक नहीं थी। कई लोगों ने साफ कहा कि उनके क्षेत्र में न कोई स्वास्थ्यकर्मी पहुंचा और न ही कोई जागरूकता गतिविधि देखने को मिली। इससे लोगों में जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति नाराजगी साफ झलक रही है।
एक महीने तक चले विशेष अभियान की शुरुआत उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बलरामपुर अस्पताल से की थी। अभियान को सफल बनाने के लिए सीएमओ कार्यालय की ओर से आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें घर-घर जाकर लोगों को बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने, कुपोषित बच्चों की पहचान करने और 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ‘ए’ की खुराक देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अलावा बुखार, इन्फ्लूएंजा, क्षय रोग, कुष्ठ रोग, फाइलेरिया और कालाजार जैसे रोगों के लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर उनका इलाज सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए थे। विभाग की ओर से पोस्टर, बैनर और स्टीकर के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार का दावा किया गया था, जिन्हें घरों और सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा किया जाना था।
यह अभियान बहुत ही महत्वपूर्ण था। इसकी मॉनिटरिंग की भी जिम्मेदारी सम्बंधित अधिकारियों की तय की गई थी। यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जांच कराकर सम्बंधित के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ
बोले लोग
इस अभियान के बारे में हमें जानकारी ही नहीं है। कोई भी स्वास्थ्य कर्मी भी हमारे घर या गांव में नहीं आया न ही कोई प्रचार वाहन क्षेत्र में दिखा। गांव में हर तरफ गंदगी है। नियमित साफ सफाई भी नहीं होती।-बैजनाथ, दहियाताली, माल
दस्तक अभियान के तहत हमारे घर में कोई नहीं आया। गांव में पोस्टर बैनर तक नहीं लगाए गए। सिर्फ अखबार के माध्यम से ही इस अभियान की जानकारी मिली।-देशराज गौतम, बाजारगांव,माल
हर साल मच्छर जनित बीमारियों से लोग परेशान होते हैं। इसके प्रति जागरूक होना जरुरी है। हम तो अपने घर के आसपास साफ सफाई रखते हैं, लेकिन अन्य लोगों को जागरूक करने में संबंधित विभाग रूचि नहीं दिखा रहा।- अमित कुमार, चंदनापुर,बीकेटी
कोई भी स्वास्थ्य कर्मी जागरूक करने के लिए नहीं पहुंचा। अन्य विभागों ने भी साफ सफाई नहीं कराई। जिम्मेदारों की यह लापरवाही आमजनों को भारी पड़ेगी।-अंगद पाल, आटेसुआ, इटौंजा
दस्तक अभियान क्या है यह सिर्फ अखबारों में ही पढ़ने को मिलता है। लेकिन गांव में अखबार बहुत कम लोग पढ़ते हैं ऐसे में सम्बंधित विभाग को ईमादारी से अपना काम करना चाहिए।-विकास सिंह एडवोकेट, गनियार,मोहनलालगंज
कोई भी स्वास्थ्य कर्मी क्षेत्र में नहीं आया। पिछले साल तो कुछ जगह पर स्टिकर चस्पा किए गए थे। इस साल यह अभियान कब निपट गया पता ही नहीं चला।-विपिन कुमार पाण्डेय, दहियर, मोहनलालगंज
इस अभियान को लेकर कुछ सार्वजानिक जगहों और सरकरी अस्पतालों के पास होल्डिंग देखने को मिली, लेकिन गांवों में ऐसा कुछ नहीं रहा। प्रचार वाहन भी नहीं दिखे।-आशुतोष शुक्ल, मोहनलालगंज
