संपादकीय:अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता

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Published By Monis Khan
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में ‘मिशन दृष्टि’ का प्रक्षेपण एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के साथ-साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की परिपक्वता का सशक्त प्रमाण भी है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप गैलेक्सआई द्वारा विकसित यह ऑप्टोसार उपग्रह, पृथ्वी अवलोकन की परंपरागत सीमाओं को तोड़ते हुए भारत को वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में एक नई पहचान है। 

अमेरिका के कैलीफोर्निया में स्पेसएक्स के फॉकन 9 रॉकेट से 190 किलो वजनी देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र द्वारा निर्मित सबसे भारी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण, वैश्विक साझेदारी और तकनीकी लचीलेपन का उदाहरण है, परंतु इस मिशन की वास्तविक शक्ति इसके ‘ऑप्टोसार’ तकनीक में निहित है, जहां इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और सिंथेटिक एपर्चर रडार सेंसर का संयोजन इसे हर मौसम और दिन-रात निगरानी में सक्षम बनाता है। यह क्षमता अब तक सीमित देशों या अलग-अलग प्रणालियों में बंटी हुई थी, जबकि भारत ने इसे एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया है। 

रणनीतिक दृष्टि से यह उपलब्धि ‘गेम चेंजर’ है। भारत को लंबे समय तक उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग के लिए विदेशी कंपनियों, विशेषकर अमेरिकी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा। पहलगाम हमले के बाद की सैन्य कार्रवाइयों के दौरान सटीक उपग्रह चित्रों की कमी और बाहरी निर्भरता के कारण प्राप्त चित्रों को भी साझा न करने की हमारी कमजोरी को उजागर किया था। मिशन दृष्टि इस निर्भरता को समाप्त करता है और भारत को ‘सॉवरेन स्पेस इंटेलिजेंस’ की दिशा में ले जाता है। अब सेना को बादलों, अंधेरे या प्रतिकूल मौसम की बाधाओं के बिना वास्तविक समय में सीमा पार गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी और वह उसे साझा भी कर सकेगा। साथ ही साथ यह मिशन केवल रक्षा तक सीमित नहीं है। 

कृषि मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन, तटीय सुरक्षा और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता व्यापक है। बाढ़ या चक्रवात के समय त्वरित और सटीक डेटा निर्णय लेने की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है। इस प्रकार, मिशन दृष्टि ‘ड्यूल-यूज़ टेक्नोलॉजी’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां नागरिक और सैन्य दोनों लाभ एक साथ प्राप्त होते हैं। इस का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तीव्र बढ़त को दर्शाता है। गैलेक्सआई जैसे स्टार्टअप का मात्र पांच वर्षों में इस स्तर की तकनीक विकसित करना बताता है कि सरकारी सुधार, जैसे निजी भागीदारी को प्रोत्साहन और इसरो की वाणिज्यिक इकाई के साथ साझेदारी, अब परिणाम देने लगे हैं। यह परिवर्तन भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को सरकारी एकाधिकार से निकालकर नवाचार-प्रधान मॉडल की ओर ले जा रहा है। 

वैश्विक संदर्भ में देखें तो अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे देश पृथ्वी अवलोकन में अग्रणी रहे हैं, लेकिन ऑप्टोसार जैसी एकीकृत प्रणाली भारत को तकनीकी बढ़त देती है। यह न केवल सुरक्षा बल्कि ‘स्पेस इकोनॉमी’ में भी भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है, क्योंकि डेटा सेवाओं का वैश्विक बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। ‘मिशन दृष्टि’ भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक निर्णायक मोड़ है। यह आत्मनिर्भरता, नवाचार और रणनीतिक सोच के संगम का प्रतीक है।