बिहार मंत्रिपरिषद विस्तार : सम्राट चौधरी सरकार का पहला बड़ा विस्तार, नीतीश कुमार के बेटे निशांत सहित 31 मंत्रियों ने ली शपथ
पटना। बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार की मंत्री परिषद का बृहस्पतिवार को विस्तार किया गया तथा जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और 30 अन्य लोगों ने गांधी मैदान में आयोजित एक समारोह में मंत्री पद की शपथ ली। राज्य में पांच दलों वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी घटक दलों से कुल 31 लोगों को राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। निशांत कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अलावा, पूर्व मंत्री श्रवण कुमार और अशोक चौधरी को मंत्री परिषद में शामिल किया गया है।
PM मोदी हुए शामिल
जहां वे राज्य में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री पटना हवाई अड्डे से गांधी मैदान के लिए रवाना हुए, जहां पूर्वाह्न 12 बजकर 15 मिनट पर नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाना है। सड़क के दोनों ओर बैरिकेड के पीछे खड़े लोगों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर और नारे लगाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री ने भी लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। इस कार्यक्रम को पार्टी द्वारा एक बड़े उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि हिंदी पट्टी के उस एकमात्र राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनी है, जहां पिछले महीने जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे तक सत्ता भाजपा की पहुंच से बाहर रही थी।
अत्यंत पिछड़ा वर्ग से सर्वाधिक नौ मंत्री
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में बृहस्पतिवार को किया गया। मंत्रिमंडल विस्तार में राज्य के सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया। शपथ लेने वाले मंत्रियों में से सात मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जबकि सर्वाधिक नौ मंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा दो ब्राह्मण, दो भूमिहार और तीन राजपूत समुदाय से मंत्री बनाए गए हैं। वहीं सात मंत्री दलित समाज से हैं।
मंत्रिपरिषद में सामाजिक समीकरण का रखा गया ख्याल
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) कोटे से एक राजपूत और एक दलित नेता को मंत्री बनाया गया है। उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) से एक ओबीसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) से एक दलित नेता को मंत्री बनाया गया है।
मंत्रिमंडल में जदयू कोटे से एकमात्र मुस्लिम मंत्री को भी शामिल किया गया है। नये मंत्रिमंडल की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि इसमें तीन ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिनके पिता बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। संतोष कुमार सुमन के पिता जीतन राम मांझी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। वहीं नीतीश मिश्रा के पिता जगन्नाथ मिश्रा तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस सूची में निशांत कुमार का नाम भी शामिल है, जिनके पिता नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बृहस्पतिवार को बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में शामिल होंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, मोदी पूर्वाह्न करीब 11:35 बजे पटना हवाई अड्डे पहुंचेंगे और वहां से गांधी मैदान जाएंगे, जहां समारोह का आयोजन होना है। हवाई अड्डे से समारोह स्थल की दूरी करीब छह किलोमीटर है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ''प्रधानमंत्री के काफिले को हवाई अड्डे से समारोह स्थल तक पहुंचने में करीब 30 मिनट लगेंगे। सड़कों के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई है ताकि लोग खड़े होकर उनका अभिवादन कर सकें।'' इस समारोह को भाजपा बिहार में पहली बार अपने नेतृत्व में सरकार चलाने की उपलब्धि के रूप में देख रही है।
हिंदी पट्टी के इस महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता का नेतृत्व भाजपा को पिछले महीने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मिला। भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, ''यह निश्चित रूप से सरकारी कार्यक्रम है, लेकिन पार्टी के लिए यह विशेष महत्व का अवसर भी है। इसलिए हम भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं कि समारोह भव्य रूप से सफल हो।'' भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
पिछले महीने पार्टी नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ अपेक्षाकृत सादे समारोह में हुई थी, लेकिन अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती राजनीतिक मजबूती और असम में पार्टी की पकड़ मजबूत होने से कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ गया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों से पटना में रुक-रुक कर हो रही बारिश और आंधी-तूफान समारोह को लेकर चिंता का विषय बने हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महासचिव बी एल संतोष बुधवार रात से ही पटना में मौजूद हैं।
समारोह से पहले केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा समेत भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के भी पहुंचने की संभावना है। राजग सहयोगियों में नीतीश कुमार भी समारोह में मौजूद रह सकते हैं। उनके पुत्र निशांत कुमार ने सम्राट चौधरी सरकार में शामिल होने पर सहमति दे दी है। बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ा था। राजनीति से अब तक दूर रहे उनके 45 वर्षीय पुत्र ने जदयू कार्यकर्ताओं के आग्रह पर सार्वजनिक जीवन में आने का फैसला किया है।
कार्यकर्ताओं को आशंका थी कि पार्टी प्रमुख के सत्ता छोड़ने के बाद जदयू के भविष्य पर असर पड़ सकता है। समारोह में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के भी शामिल होने की संभावना है। उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को पूर्ववर्ती नीतीश मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद मिले थे, लेकिन नई भाजपा नीत सरकार में उसे अभी प्रतिनिधित्व का इंतजार है। राज्य सरकार में फिलहाल केवल दो मंत्री हैं -जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव जिन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसे सत्ता संतुलन में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
पहले नीतीश कुमार सरकार में सम्राट चौधरी और भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री थे। संविधान के अनुसार, राज्य विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सकता। बिहार विधानसभा में 243 सदस्य हैं, इसलिए राज्य मंत्रिपरिषद में अधिकतम 36 सदस्य हो सकते हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि फिलहाल 31 मंत्री होंगे।
भाजपा और जदयू, जिनके पास राजग के 202 विधायकों में से 174 सीटें हैं, विस्तारित मंत्रिमंडल में सबसे अधिक हिस्सेदारी पाने की संभावना है। वहीं, लोजपा (रामविलास) के अलावा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) भी अपनी ताकत के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
