यूपी रेरा ने 350 प्रोजेक्ट स्थगित कर खरीदारों को बचाया, बिल्डरों ने नहीं दिए मानचित्र और भूमि अभिलेख, जांच में खुली पोल 

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Published By Anjali Singh
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- रेरा को बिल्डरों ने नहीं दिए मानचित्र और भूमि अभिलेख - जांच में खुली पोल, नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई

लखनऊ, अमृत विचार : उप्र. भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने प्रदेश भर में परियोजनाओं की जांच कराई तो 350 के स्वीकृत मानचित्र और भूमि सम्बंधित दस्तावेज नहीं मिले। बराबर नोटिस जारी करने पर भी बिल्डरों ने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। ऐसे में खरीदारों को बिल्डरों के फर्जीवाड़ा से बचाने के लिए सभी परियोजनाएं स्थगित श्रेणी में डाल दी गईं।

पिछले वर्ष बिल्डरों ने लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, वाराणसी आदि शहरों में निर्मित की जाने वाली आवासीय और व्यावसायिक इकाइयाें का पंजीयन कराकर ब्योरा रेरा की वेबसाइट पर अपलोड किया। परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार किया, ताकि घर खरीदार भूखंड, फ्लैट, दुकान आदि खरीद सकें। रेरा ने पोर्टल पर दर्ज परियोजनाओं की जांच की तो 350 के स्वीकृत मानचित्र नहीं मिले।

परियोजनाएं जहां विकसित की जानी थी, उसके भूमि सम्बंधित दस्तावेज नहीं दिए गए। इस सम्बंध में बिल्डरों को बार-बार नोटिस भेजा गया। इसके बावजूद दस्तावेज की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई हैं। इन बिल्डरों पर रेरा ने सख्त कदम उठाते हुए 350 परियोजनाओं को ''स्थगित परियोजनाएं'' श्रेणी में डाल दिया। ताकि मौजूदा और भावी आवंटियों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

मोबाइल से क्यूआर स्कैन कर जानें परियोजनाएं

उप्र रेरा ने सभी नये पंजीकरणों/लाइव पंजीकरणों में एक विशिष्ट क्यूआर कोड उपलब्ध कराया है। ये क्यूआर कोड बिल्डराें को होल्डिंग, बैनर, पम्पलेट, सोशल साइट आदि प्रचार सामग्री पर प्रिंट कराना अनिवार्य है। इस क्यूआर कोड को उपभोक्ता अपने मोबाइल पर स्कैन करके बिल्डर व परियोजना का नाम, स्वीकृत मानचित्र, लोकेशन, भूमि की जानकारी, रेरा में पंजीयन, दाम समेत परियोजनाओं की पूरी विस्तृत जानकारी कर सकते हैं। इससे अपार्टमेंट, फ्लैट, रोहाउस, कॉलोनी, विला, दुकान, कॉम्पलेक्स आदि खरीदते समय सही जानकारी से फर्जीवाड़े का शिकार नहीं होंगे।

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