लखीमपुर हिंसा मामला : सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को पेश न किए जाने पर जताई नाराजगी, जानें क्या कहा...

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य के खिलाफ 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान गवाहों को पेश न किए जाने पर शुक्रवार को नाराजगी व्यक्त की। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जो स्थिति रिपोर्ट सौंपी है उसमें गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है। पीठ ने यह भी कहा कि लगभग दो महीने से इस मामले में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है।

पीठ ने कहा, ''हम पीठासीन न्यायाधीश को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने का निर्देश देते हैं।'' पीठ ने अधीनस्थ अदालत के न्यायाधीश से मुकदमे की सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने का प्रयास करने और अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। घटना से जुड़े दो मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश की एक अदालत में की जा रही है। 

पीठ ने गौर किया कि पहले मामले में, जिन 131 गवाहों को गवाही देनी थी, उनमें से 44 की गवाही हो चुकी है, 15 को मुक्त कर दिया गया है और 72 गवाह अभी भी पेश किए जाने बाकी हैं। पीठ ने कहा कि दूसरी प्राथमिकी में 35 गवाहों में से 26 की गवाही हो चुकी है और नौ गवाह से पूछताछ अभी की जानी है। 

आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उत्तर प्रदेश द्वारा दाखिल नवीनतम स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, पहली प्राथमिकी में अब तक 44 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। दवे ने कहा, ''पिछले दो महीनों में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई है।'' उन्होंने तर्क दिया कि राज्य द्वारा मार्च में दाखिल अंतिम स्थिति रिपोर्ट में भी कहा गया था कि 44 गवाहों की गवाही हो चुकी है। 

पीठ ने उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वकील से पूछा, ''मार्च से आज तक आपने क्या किया?'' राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि सुनवाई के दौरान गवाही दर्ज कराने के लिए तीन-चार गवाहों को तलब किया गया था। इस पर पीठ ने कहा कि एक दिन के लिए तीन या चार के बजाय कम से कम सात से आठ गवाहों को तलब किया जाना चाहिए, ताकि यदि उनमें से कुछ उपस्थित न हों, तब भी निचली अदालत उसके समक्ष पेश होने वाले गवाहों के बयान दर्ज करने की कार्यवाही जारी रख सके।

शीर्ष अदालत ने यह भी आश्चर्य जताया कि सरकारी गवाह मुकदमे के दौरान अनुपस्थित कैसे रह सकते हैं। पीठ ने कहा, ''यह देखकर हमें निराशा हुई कि तथाकथित स्थिति रिपोर्ट में गवाहों को पेश न किए जाने का कोई भी कारण नहीं बताया गया है…।'' 

घटना में कथित रूप से मारे गए किसानों के परिजनों की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि मामले की सुनवाई जिस तरीके से की जा रही है, उसे लेकर शीर्ष अदालत को कुछ करना होगा। पीठ ने उल्लेख किया कि दो प्राथमिकी के अलावा, गवाहों को कथित रूप से धमकाने के संबंध में पिछले वर्ष अक्टूबर में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

इसमें कहा गया कि राज्य की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, उस मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। पीठ ने गौर किया कि स्थिति रिपोर्ट से पता चलता है कि आशीष मिश्रा के संबंध में, तीसरे मामले में उनकी कथित भूमिका की अब भी जांच की जा रही है। उच्चतम न्यायालय ने तीसरे मामले के जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे लंबित जांच पूरी करें और चार सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल करें। 

पीठ ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की अगली सुनवाई जुलाई में करना तय किया है। लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तीन अक्टूबर, 2021 को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में किसानों द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे। चार किसानों को एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) गाड़ी ने कुचल दिया था। 

इसके बाद कथित तौर पर क्रोधित किसानों ने एक चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई। एक मामले में, निचली अदालत ने दिसंबर 2023 में मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ किसानों की मौत के मामले में कथित हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य दंडात्मक धाराओं के तहत आरोप तय किए। 

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