Questions raised by paper leak: यूपीएससी की तर्ज पर दो चरण में हो नीट, अलग एजेंसी कराए परीक्षा

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Published By Muskan Dixit
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पेपर लीक से उठे सवाल, मेरिट से समझौता देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए घातक

पद्माकर पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचार: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों ने देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पेपर लीक, संगठित नकल गिरोह और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बीच चिकित्सा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत बताई है।

दो चरण में हो परीक्षा, अलग एजेंसी संभाले जिम्मेदारी

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने कहा कि नीट परीक्षा को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन(यूपीएससी) की तर्ज पर दो चरणों में आयोजित किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि दोनों चरणों के संचालन की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों को दी जाए। पहले चरण के परिणाम के तुरंत बाद उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को दूसरे चरण का प्रवेश पत्र जारी किया जाए, ताकि परीक्षा की शुचिता और विश्वसनीयता बढ़े।

“यह सिर्फ परीक्षा नहीं, भविष्य के डॉक्टरों की गुणवत्ता का सवाल”

मेरठ के चिकित्सा विशेषज्ञ प्रो.(डॉ.) अनिल नौसरान ने कहा कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले छात्रों की गुणवत्ता ही भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था तय करती है। यदि अयोग्य अभ्यर्थी अनुचित साधनों से प्रवेश प्राप्त करते हैं, तो अंततः इसका नुकसान मरीजों और पूरे समाज को उठाना पड़ता है।

दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

पूर्व आईएमए अध्यक्ष लखनऊ एवं केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.जेडी रावत का कहना है कि नीट यूजी परीक्षा का पेपर लीक होना शर्मनाक स्थिति है, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि पता चला है कि पेपर प्रिंटिंग मशीन से ही लीक हो गया था, इसके लिए चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था स्थापित करनी होगी। बताया कि पूर्व में हम लोग (केजीएमयू) सीपीएमटी की सफलतापूर्वक परीक्षाएं करा चुके हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दुबारा कोई दुस्साहस न कर सके। उन्होंने कहा कि दुबारा परीक्षा कराना क्षतिपूर्ति नहीं है, जरूरी नहीं है बच्चे का हर पेपर अच्छा हो।

एनटीए और एनएमसी पर उठे सवाल

बरेली के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अतुल अग्रवाल का कहना है कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, इस देश में एक परीक्षा नहीं हो सकती है। इससे 22.50 लाख बच्चे और उनका परिवार प्रभावित हुआ है। केंद्रीय मंत्री धमेन्द्र प्रधान को नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए, दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए,भविष्य में किसी की हिम्मत न पड़े। डॉ.अतुल अग्रवाल ने इस देश की दो महत्वपूर्ण संस्थाए, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को असफल करार देते हुए दोनों के खत्म करने की मांग की है।

पुरानी व्यवस्था लागू करें

लखनऊ आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डॉ.पीके गुप्ता का कहना है कि हर वर्ष विवाद सामने आने से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(एनटीए) को भंग कर देना चाहिए, साथ ही सुझाव दिया कि परीक्षा आयोजन की पुरानी व्यवस्था का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। इससे एक दिक्कत से पूरे देश की परीक्षा प्रभावित नहीं होगी।

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