आम नहीं है आम यह है खास
फलों की विशाल दुनिया में, आम को जो शाही दर्जा प्राप्त है, वैसा शायद ही किसी और को मिले। फलों का राजा कहे जाने वाले आम न केवल एक स्वादिष्ट उष्णकटिबंधीय फल हैं, बल्कि ऐसा पौष्टिक चमत्कार भी हैं, जो लाजवाब स्वाद और असाधारण स्वास्थ्य लाभों का संगम है। 4000 साल पहले दक्षिण एशिया में उत्पन्न हुए ये जीवंत और रसीले फल सभी महाद्वीपों में फैल चुके हैं और अपने अनोखे स्वाद और पोषक तत्वों के मिश्रण से लोगों का दिल जीतते हुए उनके शरीर को पोषण प्रदान कर रहे हैं।
सीएसआईआर केंद्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान, गुजरात आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि अपनी खास पहचान और कहानी के लिए भी मशहूर हैं। लंगड़ा आम का नाम जहां दिलचस्प कहानी से जुड़ा है, वहीं मालदाआम दुनियाभर में मशहूर है। केसर आम अपनी खुशबू और रंग के लिए जाना जाता है और हापुस आम को जीआई टैग मिला हुआ है। दूसरी ओर तोतापरी आम का उपयोग जूस, पल्प और अचार में अधिक होता है। अलग-अलग किस्मों के कारण आम हर रूप में लोगों की पसंद बना हुआ है।
आम (मैंगिफेरा इंडिका) एक उष्णकटिबंधीय फल है, जिसमें मूल्यवान आवश्यक पोषक तत्व और फाइटोकेमिकल घटकों की एक अनूठी संरचना होती है। ऐतिहासिक रूप से, ताजे आम केवल शुष्क मौसम के अंत में ही उपलब्ध होते हैं। हालांकि बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और आधुनिक फल प्रसंस्करण/संरक्षण तकनीकों के कारण, वे अब दुनियाभर के किराना स्टोरों में साल भर उपलब्ध रहते हैं। आम की सर्वउपलब्धता, विशेष सुगंध, पौष्टिकता, रसीला स्वाद तथा आकर्षक रंग के कारण इसे 'फलों का राजा' कहना बिल्कुल सही है।
भारत में आम की सबसे अधिक किस्में
भारत में आम की सबसे अधिक किस्में पाई जाती हैं और यह देश की सबसे अधिक व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली फल फसल है। माना जाता है कि आम की उत्पत्ति इंडो-बर्मा क्षेत्र में हुई और स्पेनिश खोजकर्ताओं द्वारा इसे दक्षिण अमेरिका में फैलाया गया। भारत विश्व में आम का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो प्रतिवर्ष कई करोड़ टन आम का उत्पादन करता है। बागानों के बढ़ते क्षेत्रफल के कारण भारत में आम का उत्पादन प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। भारत विश्व के कुल आम उत्पादन में 52.63प्रतिशत का योगदान देता है। देश में आम की खेती कुल क्षेत्रफल (5.57 मिलियन हेक्टेयर) का 22.1 प्रतिशत और फलों के कुल उत्पादन (47.94 मिलियन टन) का 22.9 प्रतिशत है। हालांकि आम की खेती के लिए सबसे बड़ा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में 0.27 मिलियन हेक्टेयर है, वहीं आंध्र प्रदेश में प्रति हेक्टेयर 12 टन की उच्चतम उत्पादकता है। आंध्र प्रदेश में 3.07 मिलियन टन आम का उत्पादन होता है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में क्रमशः 2.39 मिलियन, 1.79 मिलियन और 0.92 मिलियन टन आम का उत्पादन होता है। आम की मिठास को अक्सर उच्च शर्करा स्तर से भ्रमित किया जाता है और इसे मोटापे और मधुमेह से जोड़ा जाता है, जिससे परहेज की सिफारिशें और व्यवहार उत्पन्न होते हैं। परंतु वैज्ञानिक शोध इन निष्कर्षों का समर्थन नहीं करते और स्पष्ट करते हैं कि आम का सेवन और मधुमेह रोग का संबंध कंडीशनल है।
आम की पृष्ठभूमि
देश में आम की लगभग 1500 किस्में पाई जाती हैं। हालांकि कुछ विशेष किस्में ही ज्यादा प्रचलित एवं लोकप्रिय हैं। आम की प्रत्येक किस्म का अपना विशेष आकार, आकृति, रंग, बनावट और विशिष्टस्वाद होता है। रंग, स्वाद और सुगंध आम के पकने की अवस्था से भी संबंधित होते हैं। केसर, दशहरी, लंगड़ा या सिंधुरा से लेकर तोते की चोंच के आकार के तोतापुरी तक, आम की कई अनोखी किस्में भारतीय बाजारों में छाई रहती हैं। इसके अलावा, लगभग 300 ग्राम वजन का प्रसिद्ध रत्नागिरी अल्फोंसो (हापुस) और बिहार का अनोखा सुगंध वाला मालदा भी है। भारत में आमों की कई अद्भुत किस्में पाई जाती हैं, जो अप्रैल के मध्य से अगस्त तक बाजारों में छाई रहती हैं।
आम की किस्में
तोतापरी
आम की यह किस्म तोते की चोंच जैसी दिखती है। यह कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पाई जाती है। स्वाद में हल्का और रंग में हरा, इस किस्म में आम का गूदा अन्य किस्मों की तरह मीठा नहीं होता, लेकिन सलाद और अचार के लिए बहुत अच्छा होता है।
हापुस
महाराष्ट्र की मूल यह किस्म अब गुजरात और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी उगाई जाती है। पुर्तगाली जनरल ‘अफोंसो डी अल्बुकर्क’ के नाम पर इसका नाम ‘अल्फांसो’ पड़ा, जिसे महाराष्ट्र में स्थानीय रूप से ‘हापुस’ कहा जाने लगा। हापुस (अल्फोंसो) भारत में पाई जाने वाली प्रमुख आम की किस्मों में से एक है, जो अपने रस और मिठास के लिए प्रसिद्ध है। इसका स्वाद और सुगंध लाजवाब होती है। यह सबसे महंगी किस्मों में एक है इसे निर्यात भी किया जाता है और प्रसंस्करण उद्योगों में भी इसका उपयोग होता है। अल्फोंसो आम दुनिया का सबसे स्वादिष्ट आम है।
चौसा
उत्तर प्रदेश और बिहा की यह किस्म शेरशाह सूरी द्वारा सोलहवीं शताब्दी में अपने शासनकाल के दौरान लाई गई थी। बिहार के एक शहर के नाम पर इसका नाम रखा गया है। इस किस्म की विशेषता इसका बेहद मीठा गूदा और चमकीला पीला छिलका है। इसका रंग पीला-सुनहरा होता है।
रसपुरी
कर्नाटक का मैसूरु क्षेत्र में इस किस्म को भारत में आमों की रानी के रूप में जाना जाता है। यह मई महीने में आता है और जून के अंत तक उपलब्ध रहता है। दही, स्मूदी और जैम के रूप में इसका स्वाद सबसे अच्छा होता है।
लंगड़ा
यह उत्तर प्रदेश के आम की एक प्रसिद्ध किस्म है, जिसकी उत्पत्ति के वाराणसी में हुई थी। नाम के अनुसार, इसे लंगड़ा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी खेती सबसे पहले एक ऐसे व्यक्ति के खेतों में हुई थी, जिसके पैर नहीं थे। यह जुलाई से अगस्त तक उपलब्ध रहता है। अंडाकार आकार का यह आम पकने पर भी हरे रंग का रहता है।
केसर
आम में गुजरात की सबसे महंगी किस्मों में से एक इस आम के गूदे का रंग केसर जैसा होता है, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया है। इस किस्म की खेती सबसे पहले 1931 में जूनागढ़ के नवाबों द्वारा की गई थी और 1934 में इसका नाम केसर रखा गया था। इसकी सबसे खास पहचान इसकी केसर जैसी खुशबू है।
दशहरी
यह उत्तर प्रदेश की इस किस्म का नाम लखनऊ के पास स्थित दशहरी गांव के नाम पर रखा गया है। यह उत्तर भारत में एक लोकप्रिय व्यावसायिक किस्म है और हमारे देश की सर्वश्रेष्ठ किस्मों मंा से एक है। इसका फल आकार में छोटा से मध्यम, आयताकार और तिरछा होता है, और पीले रंग का होता है। इस आम की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है और इसका लंबे समय तक भंडारण किया जा सकता है।
