बीसी सखियां कर रहीं कमाल: हर महीने कमा रही 45 हजार, 40 हजार सखियों ने किया 44 हजार करोड़ का लेन-देन
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में संचालित “बीसी सखी कार्यक्रम” आज सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ गांवों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है। “एक ग्राम पंचायत – एक बीसी सखी” के सिद्धांत पर आधारित यह योजना लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 40 हजार बीसी सखियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इनके माध्यम से अब तक 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेन-देन संपन्न किए जा चुके हैं। बीसी सखियां नकद जमा एवं निकासी, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली के माध्यम से लेन-देन, बैलेंस जांच, बीमा, पेंशन तथा ऋण पुनर्भुगतान जैसी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। बीसी सखी कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया है। सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य तथा लखनऊ की अनीता पाल जैसी बीसी सखियां प्रतिमाह औसतन 45 हजार रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। अब तक बीसी सखियों ने 121 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया है, जो इस योजना की सफलता एवं महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।
