Bareilly: कागज पर वजूद की लकीर खोज रही किला नदी, अब मानवाधिकार अयोग हुआ सख्त

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। जमीन की भूख एक अरसे से नदियों का वजूद निगलने पर आमादा है। इस पर निजाम ये कि सराकारी कागज पर भी इनके वजूद की लकीर जिम्मेदारान को ढूंढे नहीं मिल रही और इसका फायदा जमीनों के सौदागर अपनी तिजोरियों को हलक तक भरने में उठा रहे हैं। मगर राहत की बात ये कि अब मानवाधिकारी आयोग जैसी संस्थाओं की नींद टूटने लगी है। लिहाजा आयोग ने अफसरान से अब अपना वजूद खत्म होने के मुहाने पर पहुंचीं किला नदी को लेकर रिपोर्ट तलब की है।

आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट
बता दें कि किला नदी के वजूद पर मंडरा रहे खतरे का मामला अब मानवाधिकार आयोग की दहलीज पर पहुंच गया है। रसूखदार कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं की ओर से नदी की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त और धड़ल्ले से किए गए पक्के निर्माणों को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल विस्तृत आख्या तलब की है, जिससे संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।

इन गांवों में संकरा नाला बनी नदी
दरअसल, तहसील सदर की राजस्व टीम की ओर से की गई पैमाइश और सीमांकन में सुर्खा छावनी, वाकरनगर, सुंदरासी, महेशपुर अटरिया और रहपुरा चौधरी सहित करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में नदी का स्वरूप सिमटकर संकरे नाले जैसा हो चुका है। हद तो यह है कि सरकारी कागजों में सैदपुर हाकिंस और सुर्खा छावनी जैसे क्षेत्रों में नदी का कोई रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं है, जबकि वहां जलधारा मौजूद है। इसी का फायदा उठाकर स्वालेनगर नवदिया और जसौली जैसे इलाकों में नदी की बेशकीमती भूमि पर आलीशान मकान, बाउंड्रीवॉल और व्यावसायिक ढांचे खड़े कर दिए गए।

यहां नदी पर हुआ पक्का निर्माण
जांच रिपोर्ट में गाटा संख्या 391 और 886-887 जैसी जमीनों पर खुलेआम पक्का अवैध निर्माण पाया गया, लेकिन रसूखदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट में उनके नाम अज्ञात लिख दिए गए। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भूमाफिया और जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत के कारण ही सालों से यह खेल चल रहा था। अब मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अभियंता राजीव कुमार राठी ने संपत्ति विभाग से पूरी रिपोर्ट संकलित की है, जिसे जल्द ही जिला प्रशासन को सौंप दिया जाएगा

 

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