UP Liquor Shops: यूपी में खुलेंगी करीब 600 नई शराब दुकानें, आबादी सर्वे के बाद तय होगी संख्या
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आने वाले महीनों में करीब 600 नई फुटकर शराब की दुकानें खुल सकती हैं। आबकारी विभाग पिछले एक साल में प्रमुख शहरों के बाहरी इलाकों में शिफ्ट हुई आबादी का अनुमान लगा रहा है। इसके बाद ही नई दुकानों की सही संख्या तय होगी।
विभाग का मकसद हाल ही में बसी आवासीय कॉलोनियों में विदेशी शराब, बीयर और अन्य शराब की मांग को पूरा करना है। इससे 2026-27 वित्तीय वर्ष में राजस्व भी बढ़ेगा। 31 मार्च से कई दुकानदारों ने वित्तीय व्यवहार्यता न होने का हवाला देकर शराब का कारोबार छोड़ दिया है। प्रदेश में 27,308 शराब दुकानें थीं।
इनमें से 421 मॉडल शॉप, देशी शराब और कंपोजिट शॉप के लिए चार दौर की लॉटरी के बाद भी कोई खरीदार नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि पांचवें दौर में 2025-26 में इन दुकानों के लिए चुकाई गई मूल लाइसेंस फीस में 20% तक की कटौती की जा सकती है, ताकि संचालन व्यवहार्य हो सके। एक अधिकारी ने कहा, अंतिम फैसला अभी बाकी है। शहर की सीमा में लाइसेंस फीस बहुत ज्यादा होने के कारण कई उद्यमियों ने मॉडल शॉप छोड़ दीं। जो दुकानें अब तक नवीनीकृत या आवंटित नहीं हो पाईं, उनके अलावा विभाग करीब 600 नई दुकानें लाने पर विचार कर रहा है।
दरअसल आबकारी नीति के तहत आबकारी आयुक्त को जरूरत पड़ने पर नई आवासीय कॉलोनियों को कवर करने के लिए और दुकानें खोलने का अधिकार है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "नीति के तहत आबकारी आयुक्त किसी जिले में पिछले वित्तीय वर्ष की कुल फुटकर दुकानों की संख्या की तुलना में तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं।"
नई दुकानें खोलने से विभाग को मौजूदा दुकानों की लाइसेंस फीस तर्कसंगत करने से होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी। अनुमान है कि पिछले वित्तीय वर्ष में लाइसेंस फीस और प्रोसेसिंग फीस से विभाग को 4,000-5,000 करोड़ रुपये मिले। कुल मिलाकर 2025-26 में शराब व्यापार पर शुल्क और फीस लगाकर विभाग ने 57,722 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व हासिल किया। सैचुरेशन पॉइंट पर पहुंचने के बाद आबकारी विभाग नए उपायों के जरिए अतिरिक्त राजस्व के रास्ते तलाश रहा है।
