Moradabad: सोने की ज्वेलरी पर असर नहीं, निवेश होगा प्रभावित, पुराने सोने के एक्सचेंज को बढ़ावा देने की मांग
मुरादाबाद, अमृत विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोने की खरीद नहीं करने की अपील के बाद सराफा बाजार में इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने सोने के आयात से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करने के उद्देश्य से यह अपील की है।
हालांकि, सराफा कारोबारियों का मानना है कि इसका सीधा असर ज्वेलरी कारोबार पर अधिक नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि भारत में शादी-विवाह, धार्मिक पर्व और पारिवारिक परंपराओं में सोने के आभूषण खरीदने की संस्कृति लंबे समय से चली आ रही है। यही कारण है कि लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद लोग आभूषणों की खरीदारी कर रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार प्रधानमंत्री की अपील का सबसे अधिक असर निवेश के उद्देश्य से खरीदे जाने वाले सोने के बार, बिस्किट, सिक्कों और एमसीएक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर हो सकता है। निवेश के लिए खरीदा गया सोना लंबे समय तक बाजार में वापस नहीं आता, जिससे आयात की आवश्यकता बढ़ती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।
सराफा कारोबारी दीपांशु अग्रवाल ने कहा कि देश में ज्वेलरी कारोबार केवल व्यापार नहीं बल्कि लाखों कारीगरों और छोटे व्यवसायियों की आजीविका का आधार है। यदि लोग निवेश के बजाय जरूरत और परंपरा के अनुसार खरीदारी करें तो बाजार संतुलित रहेगा और रोजगार भी सुरक्षित रहेगा।
वहीं, कारोबारी नीरज गुप्ता का कहना है कि सरकार को पुराने सोने के एक्सचेंज और पुनर्चक्रण की व्यवस्था को अधिक प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और सोने के आयात में कमी आने से देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। आने वाला समय जिम्मेदार उपभोग और स्वर्ण पुनर्चक्रण आधारित अर्थव्यवस्था का होगा, जिसमें उपभोक्ता, उद्योग और राष् तीनों का हित सुरक्षित रहेगा।
