UP News: घर लौटने की उम्मीद में फिर सड़कों पर उतरे आकांक्षी जिलों के शिक्षक, निदेशालय घेरा 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक एक बार फिर सड़कों पर उतरने लगे हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के राजधानी लखनऊ में रेंगकर प्रदर्शन के करने बाद अब  'आकांक्षी जिलों' में तैनात शिक्षक अपने ट्रांसफर को लेकर आंदोलनरत हैं। शिक्षा विभाग अपन अनदेखी और भेदभाव का आरोप लगाते हुए वे अपने गृह जनपद के लिए ट्रांसफर मांग रहे हैं। बुधवार को यूपी के तमाम जिलों से शिक्षक लखनऊ पहुंचे। तपती धूप में बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों को मांगपत्र सौंपा। 
 
आकांक्षी जिलों के शिक्षक इस बात को लेकर काफी नाराज भी हैं कि ट्रांसफर के मुद्दे पर उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो गंभीर रूप से बीमार हैं तो किसी के माता-पिता या पत्नी-बच्चे हैं। इस मुश्किल वक्त में वह अपने परिवार के साथ रहना चाहते हैं। लेकिन उनकी समस्या को कोई समझने वाला नहीं है। वे शारीरिक और पारिवारिक संकटों को आगे रखते हुए गृह-जनपदों में तैनाती मांग रहे हैं। पिछले दिनों, यूपी के विभिन्न जनपदों से शुरू हुआ शिक्षक संगठनों के विरोध की तपिश राजधानी तक पहुंच चुकी है। 

आकांक्षी जनपद है क्या? 
-नीति आयोग की एक रिपोर्ट में देश के जो सबसे पिछड़े जिले हैं, उनके विकास के लिए शिक्षा-व्यवस्था बेहतर करने पर विशेष जोर देने को कहा गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे जिलों को आकांक्षी जनपद की श्रेणी में रखा है। यूपी में करीब आठ आकांक्षी जनपद हैं-जिनमें सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, चंदौली,  सोनभद्र, चित्रकूट, फतेहपुर और बलरामपुर जिला शामिल है। कुछ ब्लॉक भी आकांक्षी हैं। ऐसे जनपदों की शिक्षा-व्यवस्था सुधारने के प्रयास जारी हैं। 

शिक्षकों अंतर-जनपदीय ट्रांसफर पर रोक
-बेसिक शिक्षा विभाग ने जो आकांक्षी जिले घोषित कर रखते हैं-वहां तैनात शिक्षकों के अंतर-जनपदीय ट्रांसफर पर रोक लगा रखी है। वर्ष 2019-20 की ट्रांसफर नीति आने के बाद से ही इन जिलों में तैनात शिक्षक विरोध पर अड़े हैं। छह साल से एक ही मांग उठाते आ रहे हैं कि उन्हें भी सामान्य जिलों में तैनात शिक्षकों की तरह अपने गृह-जनपदों में ट्रांसफर का मौका दिया जाए। लेकिन विभाग लगातार इस मांग की अनदेखी करते आ रहा है। उधर, सामान्य जिलों में अंतर-जनपदीय ट्रांसफर प्रक्रिया साल दर साल चलती रहती है। 

भर्ती क्यों नहीं कर रही सरकार 
-विरोध-प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का तर्क है कि आकांक्षी जनपदों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए शासन को वहां विशेष रूप से भर्तियां करनी चाहिए। सवाल ये है कि आखिर शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं की जा रही? हर बार समाधान के आश्वासन की घुट्टी काम नहीं करेगी। विभाग को हमारी समस्याओं को समझना होगा। 

कोर्ट से मिल चुकी मामूली राहत 
-सड़कों पर आक्रोश के साथ शिक्षकों का एक धड़ा ट्रांसफर की अपील लेकर कोर्ट भी जा चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को सुना और थोड़ी राहत भी दी। कोर्ट ने कहा कि गंभीर बीमारियों के आधार पर शिक्षा विभाग, आकांक्षी जिलों में तैनात शिक्षकों के उनके गृह-जनपद में ट्रांसफर देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकता है। 

यूटा ने भी उठाई मांग 
-यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन  (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बेसिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक को संबोधित मांग पत्र में कहा कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में अंतर-जनपदीय ट्रांसफर कार्यक्रम अतिशीघ्र घोषित किया जाए। अभी हजारों की संख्या में ऐसे टीचर्स हैं, जो अपने घरों से 400-500 किलोमीटर दूर तैनात हैं। एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उन्हें अपने गृह-जनपदों में लौटने का मौका नहीं मिला। इससे वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

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