Moradabad: परंपरा तोड़कर फरियादियों के पास पहुंचे जिलाधिकारी
मुरादाबाद, अमृत विचार। कार्यभार संभालने के बाद से ही अपनी अलग कार्यशैली का परिचय जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया दे रहे हैं। पहले ही दिन कलक्ट्रेट स्थित उनके कक्ष के गेट पर डोर मेटल फ्रेम डिटेक्टर लगा तो इसकी चर्चा रही। फिर अगले ही दिन उन्होंने बुके की जगह एक पुष्प एक किताब से स्वागत करने की जन सामान्य से अपील कर पर्यावरण संरक्षण की पहल को आगे बढ़ाया।
कलक्ट्रेट में बुधवार को सुबह 10 बजे जन सुनवाई करने के दौरान वह अपनी सीट पर बैठने की बजाय उनके कार्यालय कक्ष में आए फरियादियों के पास ही पहुंच गए। हर आम व खास से मिलकर उन्होंने समस्या की जानकारी ली। इसी बीच व्हील चेयर पर एक दिव्यांग जब पहुंचा तो कक्ष में उसके प्रवेश से पहले ही जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया खुद कक्ष से बाहर निकल कर जनता के बीच आ गए। दिव्यांग से उसकी पीड़ा व समस्या जानने के बाद जिलाधिकारी ने उसके त्वरित निस्तारण का निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया। उनकी अलग कार्यशैली की कलक्ट्रेट अधिष्ठान के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ आने वाले मुलाकातियों के बीच खूब चर्चा रही।
वहीं अपने कार्यकाल के पहले दूसरे दिन ही उन्होंने महंगे और प्लास्टिक या कृत्रिम फूलों पर पैसा लगाने को फिजूलखर्ची बताते हुए जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की कि उनके पास या किसी अन्य सार्वजनिक आयोजनों में आएं-जाएं तो मिलने पर एक पुष्प और एक पुस्तक भेंट करें। इससे कृत्रिम फूलों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है साथ ही बुके पर 250-500 रुपये खर्च करने की बजाय किसी को ज्ञानवर्धक व जनोपयोगी पुस्तक भेंट करें जिससे ज्ञानवर्धन के साथ ही किताबें पढ़ने के प्रति लोगों का लगाव बढ़ेगा। साथ ही मोबाइल के अतिशय प्रयोग से भी बचा जा सकेगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार जन सामान्य की शिकायतों व समस्याओं का त्वरित व गुणवत्तापूर्वक समाधान ही उनकी प्राथमिकता है। कहा कि पर्यावरण संरक्षण सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।
