Uttrakhand News: प्रदेश के जंगलों में गजराज की संख्या पता लगाएगा वन विभाग, पहली बार मोबाइल एप में देना होगा डेटा

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Published By Monis Khan
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हल्द्वानी, अमृत विचार। छह वर्ष बाद, उत्तराखंड में एक बार फिर से हाथियों की गणना की जाएगी। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की मदद से होने वाली यह गणना डायरेक्ट साइटिंग मैथड से की जाएगी। पहली बार हाथी गणना का डेटा मोबाइल ऐप में भी देना होगा।

वन अधिकारियों के अनुसार, 20 मई से 30 जून नैनीताल, अल्मोड़ा, चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी आदि जिलों के जंगलों में हाथियों की गणना की जाएगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जंगलात के फील्ड स्टाफ व संबंधित अधिकारियों-कर्मियों को इस बाबत प्रशिक्षण दिया गया है। 42 दिनों तक होने वाली गणना में डायरेक्ट साइटिंग मैथड अपनाया जाएगा।

सरल शब्दों में कहें तो प्रत्येक वन डिवीजन में हाथियों को देखकर संबंधित रेंज, बीट, प्लॉट आदि के साथ हाथियों की संख्या नोट करेगा। इस गणना की शुरुआत के पांच दिनों में वन कर्मी अपनी-अपनी बीट पर पांच किमी की ट्रांजिक्ट लाइन पर पैदल चलेंगे। इस दौरान जो भी हाथी दिखाई देगा उसका ब्योरा संबंधि प्रपत्र में भरने के साथ ही मोबाइल ऐप में भी दर्ज करेंगे।

तराई, भाबर व पर्वतीय वन डिवीजन भौगोलिक हालात के अनुसार गणना करेंगे। बाद में सभी वन डिवीजनों का डाटा डब्ल्यूआईआई भेजा जाएगा, जहां से डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा, फिर अंतिम रिपोर्ट से हाथियों की संख्या जारी की जाएगी।

1792 हाथियों के साथ देश में पांचवें नंबर पर था उत्तराखंड
 वर्ष 2020 में उत्तराखंड में हाथियों की गणना हुई थी तब प्रदेश में कुल 1792 हाथी रिकॉर्ड किए गए थे। देश में उत्तराखंड का पांचवां नंबर था जबकि पहले नंबर पर कर्नाटक, दूसरे पर असम, तीसरे पर तमिलनाडु और चौथे नंबर पर केरल था। इधर, कुल हाथियों का 68 प्रतिशत हाथी कॉर्बेट नेशनल पार्क में हैं। यहां 1224 हाथी पाए गए थे ।

ए-स्ट्रिप ईकोलॉजी में दर्ज करना होगा डाटा
हाथियों की गणना में नियुक्त वन कर्मियों को एम-स्ट्राइप्स ईकोलॉजी ऐप में डाटा दर्ज करना होगा। इस ब्योरे में गजराज की संख्या, सटीक जीपीएस लोकेशन, गजर का जेंडर आईडेंटिफिकेशन (नर या मादा), अनुमानित आयु समूह और गजराज के साथ बच्चों की संख्या व वन्यकर्मी से हाथी की अनुमानित दूरी आदि तय करनी होगी।

जानिए क्या बोले वनाधिकारी
उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने बताया कि  राज्य में हाथियों की गणना के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद से यह गणना की जाएगी। राज्य के वन एवं वन्य परिवेश हाथियों व अन्य वन्यजीवों के लिए अनुकूल है। राज्य में लगातार हाथियों की संख्या बढ़ रही है। वनों के बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा की वजह से हाथियों की संख्या में वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है।

 

 

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