बाराबंकी : घाघरा की उफनती लहरों के बीच गूंजे सायरन, मची भगदड़… अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

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Published By Deepak Mishra
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आपदा से निपटने की तैयारी का पूर्वाभ्यास, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

सूरतगंज/बाराबंकी, अमृत विचार। बुधवार की सुबह घाघरा नदी का शांत किनारा अचानक चीख-पुकार, सायरनों और भागती भीड़ के शोर से कांप उठा। नदी की लहरें तेजी से हिलोरें मारने लगीं तो ऐसा लगा मानो बाढ़ ने गांव को अपनी गिरफ्त में ले लिया हो। हेतमापुर क्षेत्र के उधिया गांव में अफरा-तफरी मच गई। चारों तरफ सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी, बाढ़ आ गई...गांव खाली करो...। 

इसी बीच बाढ़ राहत कंट्रोल रूम से चेतावनी प्रसारित होने लगी। कुछ ही पलों में नदी किनारे प्रशासनिक गाड़ियों का काफिला सायरन बजाते हुए पहुंच गया। वायरलेस सेट हाथ में लिए तहसीलदार विपुल सिंह लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत देते नजर आए। घाघरा की तेज धाराओं के बीच लखनऊ से पहुंची एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम ने मोर्चा संभाला। जवानों ने नावों और आधुनिक उपकरणों के सहारे सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकालकर तटबंध तक पहुंचाया। 

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यह दृश्य देखकर ग्रामीणों की सांसें थम गईं। इसी दौरान सूचना मिली कि नदी में एक नाव पलट गई है। नाव पर बलाईपुर निवासी वसीम, सुंदरनगर के इरफान, हेतमापुर के कल्लू और शरीफ सवार थे। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ टीम प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार और एनडीआरएफ निरीक्षक राम सिंह अपनी टीम के साथ उधिया गांव पहुंचे। 

रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। स्टीमर और रिमोट ऑपरेटर लाइफ ब्वॉय नदी में उतारे गए। नाव में सवार दो गोताखोर किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, जबकि बाकी लोगों को रिमोट ऑपरेटर लाइफ ब्वॉय किट की मदद से एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। गहरे पानी में डूबे जिबराईल को खोज निकालने के बाद टीम ने पहले स्टीमर पर ही प्राथमिक उपचार दिया। 

इसके बाद तटबंध किनारे बनाए गए अस्थायी स्वास्थ्य शिविर और फिर एंबुलेंस से सीएचसी सूरतगंज भेजा गया, जहां डा. प्रणव और डा. प्रदीप यादव ने अपनी टीम के साथ उनका उपचार किया। उधर, नदी के दूसरे छोर पर कंधाईलाल, दीपक, इसराइल और तौफीक के फंसे होने की सूचना मिलते ही दूसरी टीम सक्रिय हुई और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। तटबंध पर पहुंचे ग्रामीणों को राहत सामग्री भी वितरित की गई।

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हालांकि बाद में जब लोगों को पता चला कि यह वास्तविक बाढ़ नहीं बल्कि बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी का पूर्वाभ्यास यानी मॉक ड्रिल है, तो उन्होंने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने तालियां बजाकर जवानों का उत्साहवर्धन किया। सरयू नदी किनारे आयोजित इस मॉक ड्रिल का नेतृत्व जिला आपदा विशेषज्ञ रामजी ने किया। बाढ़ की स्थिति में डूबने वाले प्राथमिक विद्यालय हेतमापुर के बच्चों की पढ़ाई तटबंध पर अस्थायी कक्ष बनाकर जारी रखने का प्रदर्शन भी किया गया।

बाढ़ राहत केंद्र पर राजस्व विभाग, बाढ़ प्रखंड, सिंचाई विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग, सुरक्षा एवं पुलिस विभाग, एसडीआरएफ बटालियन, फायर ब्रिगेड और पशुपालन विभाग के कैंप लगाए गए थे। तहसीलदार ने सभी कैंपों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान उपजिलाधिकारी आनंद कुमार तिवारी, डा. अनिल वर्मा, बसंत मिश्रा, प्रद्दुम अवस्थी, उपेंद्र सिंह भदौरिया समेत कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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