खोज : ऐसे हुआ इलेक्ट्रॉन का आविष्कार
इलेक्ट्रॉन की खोज विज्ञान के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक मानी जाती है। इस खोज ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि उसके भीतर भी छोटे-छोटे कण मौजूद होते हैं। इलेक्ट्रॉन की खोज वर्ष 1897 में प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन ने की थी। जे. जे. थॉमसन कैथोड किरणों पर प्रयोग कर रहे थे।
उन्होंने एक विशेष कांच की निर्वात नली, जिसे कैथोड रे ट्यूब कहा जाता है, का उपयोग किया। इस नली में दो इलेक्ट्रोड लगाए गए थे और उसमें उच्च वोल्टेज की विद्युत धारा प्रवाहित की गई। प्रयोग के दौरान उन्होंने देखा कि कैथोड से निकलने वाली किरणें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र की ओर मुड़ जाती हैं। इससे यह सिद्ध हुआ कि ये किरणें अत्यंत सूक्ष्म ऋ णावेशित कणों से बनी हैं।
थॉमसन ने इन कणों को “इलेक्ट्रॉन” नाम दिया। यह खोज आधुनिक भौतिकी के विकास में मील का पत्थर साबित हुई। इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद वैज्ञानिकों को परमाणु की संरचना को समझने में सहायता मिली। आगे चलकर इसी आधार पर बिजली, रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास संभव हो पाया। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन की खोज ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक नई क्रांति ला दी।
वैज्ञानिक के बारे में
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जे. जे. थॉमसन का पूरा नाम जोसेफ जॉन थॉमसन था। उनका जन्म 18 दिसंबर 1856 को इंग्लैंड के Manchester में हुआ था। बचपन से ही उन्हें गणित और विज्ञान में विशेष रुचि थी। उन्होंने University of Cambridge के ट्रिनिटी कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं प्रोफेसर बने। वर्ष 1897 में उन्होंने इलेक्ट्रॉन की खोज कर विज्ञान जगत में नई क्रांति ला दी। उनके शोध ने परमाणु संरचना को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने “प्लम पुडिंग मॉडल” भी प्रस्तुत किया, जो उस समय परमाणु की संरचना को समझाने का महत्वपूर्ण सिद्धांत था। थॉमसन का विवाह रोज एलिज़ाबेथ पेजेट से हुआ और उनके दो बच्चे थे। वर्ष 1906 में उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। सरल स्वभाव और मेहनती व्यक्तित्व के धनी थॉमसन का निधन 30 अगस्त 1940 को हुआ।
