Moradabad News : पेट्रोल-डीजल महंगा होने से मुश्किल में गृहस्थी, लोगों की थाली पर पड़ा असर
केंद्र सरकार के द्वारा पेट्रोल, डीजल की कीमतों में लगातार की जा रही वृद्धि से महंगाई बढ़ने से गृहस्थी की गाड़ी मुश्किल में पड़ती जा रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि से माल भाड़ा महंगा होने का असर दैनिक जरूरत की सामग्री पर भी पड़ी।
मुरादाबाद, अमृत विचार। केंद्र सरकार के द्वारा पेट्रोल, डीजल की कीमतों में लगातार की जा रही वृद्धि से महंगाई बढ़ने से गृहस्थी की गाड़ी मुश्किल में पड़ती जा रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि से माल भाड़ा महंगा होने का असर दैनिक जरूरत की सामग्री पर भी पड़ी। बाजार में दाल, खाद्य तेल, चावल, मसाले आदि की कीमतें बढ़ने से लोगों की थाली भी महंगी हो गई है।
10 फीसद तक बढ़े चावल के दाम
ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बदले वैश्विक परिदृश्य का असर भारत पर भी पड़ा। पेट्रोलियम पदार्थों डीजल, पेट्रोल की दरें पिछले दस तीन में तीन बार बढ़ाई गई। एक दिन पूर्व पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये बढ़ाने के बाद मुरादाबाद में पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गया है। प्रीमियम पेट्रोल 103 रुपये से अधिक पर बिक रहा है। पेट्रोल के साथ डीजल भी मंहगा होकर 100 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। इससे मालभाड़े में बढ़ोत्तरी के बाद खाद्य सामग्री व दैनिक जरूरत की हर सामग्री के रेट तेजी से बढ़े। सामान्य बासमती चावल चैंपियन ब्रांड के दस किलो पैकेट की कीमत पहले 650 रुपये के करीब थी जो अब बढ़कर 720-740 रुपये के बीच हो गया है।
सरसों का तेल भी हुआ महंगा
वहीं, सरसों का तेल जो पहले 165-170 रुपये प्रति लीटर था वह बढ़कर 185 रुपये प्रति लीटर हो गया है। अरहर की दाल 190 रुपये से अधिक प्रति किलो के हिसाब से अब बेची जा रही है। ड्राईफ्रूट, बेसन, सूजी, चायपत्ती आदि की नई खेप बाजार में नये रेट पर बिक्री हो रही है। सभी सामग्री में 10-15 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए हैं। वहीं पिछले दिनों कामर्शियल गैस सिलेंडर की दरें अचानक एक हजार रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाने से रेस्टोरेंट व ढाबे पर चाय भी महंगी हो गई है। कांठ रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में अब एक कप चाय 49 रुपये में दी जा रही है। इस पर जीएसटी अलग से देय होगा। वहीं काफी भी महंगी होकर मुंह चिढ़ा रही है।
ढाबे व ठेले पर महंगी हुई गरीबों की थाली
महंगाई की मार सिर्फ उच्च व मध्यम वर्ग पर ही नहीं पड़ी है बल्कि गरीबों के लिए यह और चुभ रहा है। सड़क किनारे ठेले और ढाबे पर आकर पेट भरने वालों के लिए जिंदगी और मुश्किल हो गई है। पहले कुछ ढाबे पर 40-50 रुपये प्रति थाली का रेट था। जो अब बढ़ाकर 60-80 रुपये कर दिया गया है। अचानक इस बढ़ोत्तरी से गरीब खासकर दिहाड़ी मजदूरों का निवाला महंगाई की चपेट में आ गया है। समोसा जो कई दुकानों पर आठ रुपये प्रति पीस तक बिकता था अब इसे बढ़ाकर दस रुपये प्रति पीस कर दिया गया है। अच्छे जलपान गृहों में एक सादा समोसा 15 रुपये में मिल रहा है।
