Bakrid 2026 : यूपी समेत पूरे देश में ईद-उल-अजहा की धूम, जानें इतिहास और धार्मिक महत्व

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली/लखनऊ। आज उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में ईद-उल-अजहा (बकरीद) बड़े उत्साह के साथ मनाई जा रही है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस्लाम धर्म का यह प्रमुख त्योहार कुर्बानी की ईद के नाम से भी जाना जाता है। हिजरी कैलेंडर के अंतिम महीने जिल-हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाए जाने वाले इस पर्व का मुख्य संदेश त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति पूर्ण विश्वास है।

ईद-उल-अजहा का इतिहासइस्लामी परंपरा के अनुसार, ईद-उल-अजहा की कहानी हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे हजरत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) से जुड़ी है। अल्लाह के आदेश पर हजरत इब्राहिम ने सपने में अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने का हुक्म पाया। उनके लिए सबसे अजीज चीज उनके बेटे इस्माइल थे।

पिता-पुत्र दोनों अल्लाह की मर्जी के आगे सर झुका चुके थे। जैसे ही इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने छुरी चलाई, अल्लाह ने उनके ईमान और समर्पण को स्वीकार कर लिया और इस्माइल (अलैहिस्सलाम) की जगह एक भेड़ (दुंबा) भेज दी। इसी घटना की याद में मुसलमान हर साल अल्लाह की राह में हलाल जानवरों की कुर्बानी देते हैं, जिसे सुन्नत-ए-इब्राहिमी भी कहा जाता है।

हज से संबंध

ईद-उल-अजहा हज यात्रा के समापन का भी प्रतीक है। मक्का में हज के रस्में पूरी करने वाले हाजी इस दिन अपनी इबादत को पूरा करते हैं।

त्योहार का संदेश

ईद-उल-अजहा हमें सिखाता है कि स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई सोचना ही सच्ची इबादत है। इस दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं, मिठाइयां और विशेष व्यंजन बांटे जाते हैं तथा खुशियां साझा की जाती हैं।

बकरीद त्योहार कैसे मनाया जाता है?
  1. सुबह मुसलमान साफ-सुथरे या नए कपड़े पहनकर ईदगाह या मस्जिद में जमा होते हैं।
  2. वहां ईद-उल-अजहा की दो रकात की विशेष नमाज अदा की जाती है।
  3. नमाज के बाद शांति, खुशहाली और भलाई की दुआएं मांगी जाती हैं।
  4. इसके बाद बकरे, भेड़, ऊंट या अन्य हलाल जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।
कुर्बानी के गोश्त का बंटवारा

इस त्योहार का खास सामाजिक पहलू है। गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है...

  1. गरीबों और जरूरतमंदों के लिए
  2. रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के लिए
  3. अपने परिवार के लिए

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