बिजली संकट के बीच उपभोक्ता परिषद का दावा- उत्पादन क्षमता में टॉप पांच राज्यों में यूपी पीछे...
उपभोक्ता परिषद ने कहा- सस्ती और आत्मनिर्भर बिजली के लिए बढ़ाई जाए स्टेट सेक्टर की हिस्सेदारी
परिषद के अध्यक्ष और सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं की संख्या के लिहाज से देश का नंबर-1 राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश बिजली उत्पादन क्षमता में शीर्ष पांच राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है।
लखनऊ, अमृत विचार। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और बढ़ते बिजली संकट के बीच उप्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने देश के प्रमुख राज्यों की बिजली उत्पादन स्थापित क्षमता को लेकर बड़ा दावा किया है। परिषद के अध्यक्ष और सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं की संख्या के लिहाज से देश का नंबर-1 राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश बिजली उत्पादन क्षमता में शीर्ष पांच राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उप्र में लगभग 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इसके बावजूद राज्य अपनी बिजली जरूरतों के लिए निजी और केंद्रीय क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना करनी चाहिए।
उपभोक्ता परिषद की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल-26 तक देश के शीर्ष पांच राज्यों की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गुजरात 73,627.91 मेगावाट, राजस्थान 61,381.28 ,महाराष्ट्र 59,979.65, तमिलनाडु में 47,989.37 होने के साथ उत्तर प्रदेश 39,034.67 मेगावाट है,जबकि देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 5,37,264.41 मेगावाट दर्ज की गई है।
परिषद अध्यक्ष ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की सेक्टरवार उत्पादन स्थिति पर नजर डालें तो राज्य क्षेत्र की क्षमता मात्र 9,637.73 मेगावाट है, जबकि निजी क्षेत्र की क्षमता 12,786.74 मेगावाट और केंद्रीय क्षेत्र की क्षमता 16,610.20 मेगावाट है। परिषद का कहना है कि राज्य क्षेत्र की बिजली हमेशा अपेक्षाकृत सस्ती होती है और यही महंगी बिजली खरीद पर रोक लगाने में मदद करती है।
परिषद अध्यक्ष ने कहा कि महाराष्ट्र में लगभग 2 करोड़ 85 लाख, तमिलनाडु में 2 करोड़ 30 लाख, पश्चिम बंगाल में करीब 2 करोड़ 10 लाख और कर्नाटक में लगभग 2 करोड़ 25 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा उपभोक्ता होने के बावजूद राज्य क्षेत्र की उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं है।
परिषद ने मांग की कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने के लिए राज्य में तेजी से नए तापीय, सौर और जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
